ग्रामीणों ने रुकवाया परियोजना का काम

श्रीनगर। अलकनंदा जल-विद्युत परियोजना के निर्माण कार्यों के चलते खतरे की जद में आए सेंद्रीवासी अपनी सुरक्षा को लेकर भगवान के द्वार पहुंचे। ग्रामीणों ने गांव के ही घंटाकर्ण मंदिर (थान) में पहुंचकर पूजा-अर्चना की और भगवान से सुरक्षा की गुहार लगाई। इसके बाद परियोजना स्थल पर चल रहे काम को रोका। पुनर्वास की मांग को लेकर चौरास में रैली निकाली और बैठक आयोजित की। उन्होंने परियोजना निर्माण कंपनी जीवीके पर हठधर्मिता का आरोप लगाते हुए राज्यपाल को ज्ञापन भेजा।
अपनी सुरक्षा और पुनर्वास की मांग को लेकर सेंद्री पुनर्वास समिति के सदस्य और ग्रामीण गांव के घंटाकर्ण मंदिर (थान) में पहुंचे और पूजा-अर्चना की। मांग को लेकर उन्होंने चौरास क्षेत्र में विरोध प्रदर्शन कर रैली निकाली और परियोजना स्थल पहुंचकर हाइवापर टावरों का निर्माण कार्य रोका। इसके बाद ग्रामीण पंचायती मैदान में एकत्रित हुए और बैठक आयोजित की। बैठक में परियोजना की निर्माणदायी संस्था जीवीके पर ग्रामीणों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि परियोजना प्रभावित ग्रामीणों के हितों की रक्षा के लिए जीवीके को आगे आना ही होगा। बसंती पंवार, बीना कठैत, ग्राम प्रधान लक्ष्मी कंडियाल, शांति बिष्ट, गुलाब सिंह कठैत, राजपाल सिंह असवाल, विजेंद्र कंडियाल, बीरबल सिंह, उम्मेद सिंह कपरूवाण आदि ने कहा कि बार-बार मांग के बावजूद अधिकारी बैठकों में नहीं पहुंच रहे हैं, जिससे ग्रामीणों की पुनर्वास की मांग का अभी तक कोई हल नहीं निकल पाया है। अब भगवान का ही सहारा है।

कोट
– दोनों पक्षों की दो बार बैठक करा चुके हैं, लेकिन कोई हल नहीं निकल पा रहा है। – बीके तिवारी, उपजिलाधिकारी कीर्तिनगर।

– स्थानीय प्रशासन जब कहे, हम बैठक के लिए तैयार हैं। दो दिन पूर्व हुई बैठक के दिन हम यहां नहीं थे, फिर भी हमने अपने प्रतिनिधि को बैठक में भेजा था। एसडीएम के निर्देश पर हम बैठक के लिए तत्पर रहेंगे और ग्रामीणों की समस्या का उचित समाधान निकालेंगे। – संतोष रेड्डी, समन्वयक जीवीके।

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