गुज्जर समुदाय के रिहायश पर ग्रामीण भड़के

धौलाकुआं (सिरमौर)। वन क्षेत्र में स्थायी घरों को लेकर ग्रामीणों तथा गुज्जर समुदाय के बीच तनाव पैदा हो गया है। इसे लेकर पड़दूनी पंचायत के तहत आने वाले पड़दूनी गांव में गुज्जर समाज के स्थायित्व को लेकर लोगों ने इसका भारी विरोध किया है। पड़दूनी वासियों का गुज्जरों को लेकर साफ तौर पर कहना है कि पहले इस समुदाय के लोग कुछ दिनों रह कर दूसरे स्थानों पर चले जाते थे। मगर पिछले कई अर्से से गुज्जर लोगों ने यहीं पर अपने घर बना लिए हैं जिसे लेकर ग्रामीणों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
पड़दूनी गांव के लोगों का साफ तौर पर कहना है कि बिल्लों वाली तप्पड़ के पास कई सालों से प्राकृतिक स्रोत है। यहां बादे बाड़ा, सिंबल वाड़ा, बड़ोटी वाला के किसान तथा उनके मवेशी पानी से अपना गुजारा चलाते हैं। पूर्व में गुज्जर लोग यहां कुछ दिनों के लिए आते थे। तब ग्रामीणों को कोई परेशानी नहीं थी। मगर पिछले कई अर्से से गुज्जर लोगों ने यहीं अपना डेरा डाल दिया है। समुदाय ने यहां अपने घर भी बना लिए हैं जिसके चलते पड़दूनी वासियों को पानी की भारी किल्लत हो रही है।
स्थानीय निवासी याद राम, सुंदर सिंह, देश राज, रमेश रमौल, महेश कुमार आदि ने बताया कि पिछले एक वर्ष से ग्रामीणों ने इसकी शिकायत वन क्षेत्र के डीएफओ तथा आरओ से की। ग्रामीणों ने विभाग को अवगत कराया था कि गुज्जर समुदाय के लोग सरकारी वन क्षेत्र के भीतर बिना परमिट तथा आदेशों के रह रहे हैं। मगर वन विभाग ने आज तक इस मामले में कुछ नहीं किया।
इससे पूर्व ग्रामीणों ने बताया कि वन विभाग द्वारा कार्रवाई नहीं किए जाने पर इसकी लिखित शिकायत निदेशालय वन विभाग शिमला, राज्य के वन मंत्री तथा मुख्य मंत्री को भेद दी गई है। उधर इस पूरे मामले में गिरिनगर रेंज के आरओ खतरी राम ने बताया कि गुज्जरों को तत्काल प्रभाव से वहां से हटने के आदेश दिए जा रहे हैं। समुदाय का परमिट 31 मार्च 2013 को समाप्त हो चुका है। समुदाय से इस बारे लिखित में भी मांगा गया है। शीघ्र ही यह मसला सुलझ जाएगा।

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