
हिमाचल के कर्मचारियों और पेंशनरों का सौ से अधिक निजी अस्पतालों में मुफ्त इलाज बंद हो गया है। इनमें हिमाचल के 60 और बाहरी राज्यों के 73 चिकित्सा संस्थान शुमार हैं।
इसके कारण राज्य के करीब ढाई लाख से अधिक सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों की मुफ्त इलाज की सुविधा छिन गई है।
इन अस्पतालों से कर्मचारियों-पेंशनरों के इलाज का भुगतान भी वापस नहीं मिलेगा। राज्य सरकार ने इन अस्पतालों का दोबारा रेन्यूअल नहीं किया है। इनमें से अधिकतर अस्पतालों को पूर्व भाजपा सरकार ने इलाज की स्वीकृति दी थी।
पूर्व भाजपा सरकार के कार्यकाल में हिमाचल के 115 चिकित्सा संस्थानों में राज्य कर्मचारियों और पेंशनरों को मुफ्त इलाज की सुविधा हासिल थी।
इनमें से 60 में यह सुविधा बंद हो गई है। इनमें शिमला जिले के 21, मंडी के 15, सोलन के 11, ऊना के 6, हमीरपुर के 3, कुल्लू के 2, सिरमौर और बिलासपुर के एक-एक चिकित्सा संस्थान शामिल हैं। इन संस्थानों में कुछ जांच प्रयोगशालाएं भी शामिल हैं।
हालांकि इनसे अलग दर्जनों अस्पताल ऐसे भी हैं, जिनकी कई गाइनी, पीडियाट्रिक्स, जनरल सर्जरी जैसी कई शाखाओं की एंपैनलमेंट बंद हुई है।
ऐसे चिकित्सा संस्थानों की संख्या लगभग डेढ़ दर्जन है। इनमें इलाज की मान्यता वाले मेडिसिन, डायग्नोस्टिग सेंटर आदि शामिल हैं। पूर्व में सूचीबद्ध रहे राज्य से बाहर के 89 अस्पतालों में से 73 निजी अस्पताल ऐसे हैं, जिनका रेन्यूअल नहीं किया गया है।
इनमें से अधिकतर की ओर से पंजीकरण को सरकार को आवेदन भी भेजे गए हैं। कई का राज्य स्वास्थ्य सुरक्षा एवं विनियमन निदेशालय की टीम ने निरीक्षण भी कर लिया है।
इसके बावजूद इन पर तय नियम पूरे नहीं करने पर कैंची चला दी गई है। कई की नए सिरे से सूचीबद्धता करने की प्रक्रिया चल रही है।
‘जो अस्पताल नॉर्म्स पूरे करते हैं, केवल उन्हीं में कर्मचारियों और पेंशनरों के इलाज को खर्च की वापसी की मान्यता (एंपैनलमेंट) दी जाती है। जिन्होंने यह शर्त पूरी की है, वही ऐसे इलाज को अधिकृत हैं। बाकी चिकित्सा संस्थानों की नई एंपैनलमेंट पर भी नियमानुसार विचार होगा।’
-कौल सिंह ठाकुर, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री
