
कोटद्वार। एंटी ह्यूमैन ट्रैफिकिंग की कार्यशाला में दूसरे दिन मानव तस्करी के साथ ही बालश्रम निवारण पर चर्चा की गई। अधिकारियों ने बाल अपराध और बाल श्रम रोकने के लिए प्रभावी कानूनों की जानकारी दी तथा उनका अनुपालन कराने के तरीके बताए। कार्यशाला में कहा गया कि समाज के सभी लोगों को सजग रहकर अपने दायित्वों का निर्वहन करना चाहिए। सभी के सहयोग से ही सामाजिक कुरीतियों और अपराधों पर रोकथाम संभव है।
पुलिस की एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग कार्यशाला शनिवार को दूसरे दिन भी यहां एक होटल में जारी रही। सीओ अरुणा भारती ने कहा कि मानव तस्करी से जुड़ी शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई करने की जरूरत होती है। सूचना आते ही पुलिस को संबंधित स्थान पर सघन तलाशी लेनी चाहिए। वहां मौजूद हर चीज का बारीक परीक्षण करना चाहिए क्योंकि घटनास्थल पर मिलने वाली चीजों से ही उसके सुराग मिलने की संभावना रहती है। पुलिस टीम में दो महिला पुलिस कर्मी और किसी एनजीओ के लोग भी होने चाहिये। कोर्ट में सबूत पेश करने के लिये पूरी वीडियो ग्राफी करानी जरूरी है। उन्होंने कहा कि किसी मासूम को पुलिस चौबीस घंटे से अधिक कस्टडी में नहीं रख सकती। तुरंत घटना स्थल पर किसी मासूम से पुलिस पूछताछ नहीं कर सकती। साथ ही पूछताछ वर्दी में भी नही की जा सकती हैं। क्योंकि पुलिस की वर्दी से भी बच्चे डर जाते हैं।
कार्यशाला में श्रम विभाग के अधिकारी दिनेश जुयाल ने कहा कि बालश्रम रोकने के लिए कई कानून बनाए गए हैं। कार्यशाला में अनेक सामाजिक संगठनों औरसरकारी विभागों के कर्मचारी शामिल थे।
