पता लगेगा जौनसारी सभ्यता का विकास

त्यूनी। जनजातीय क्षेत्र जौनसार बावर की घाटी में इंसान कहां से आकर बसे और कैसे इस घाटी में सभ्यता आगे बढ़ी। इन सबका अब आसानी से पता लग पाएगा। मानव विज्ञान सर्वेक्षण विभाग की टीम ने घाटी में विकास के तथ्यों का पता लगाने के लिए शनिवार को तीस गांवों के लोगों के डीएनए सैंपल लिए। अपनी अलग सांस्कृतिक पहचान के कारण जौनसार बावर हमेशा लोगों में कौतूहल का विषय रहा है। कुछ लोगों का मानना है कि जौनसार में सभ्यता का विकास पांडवों के शासनकाल के दौरान हुआ। जौनसारी समाज के लोग पांडवों के वंशज है। लेकिन इसके कोई पुख्ता प्रमाण न मिल पाने के कारण हमेशा से इस घाटी का विकास मानव के लिए अबूझ पहली ही है। लेकिन अब इसका पता लगाने के लिए टीम ने शनिवार को हनोल, सिलावड़ा, चातरा, भ्यूलाड़ा, कूपा, त्यूनी, दारागाड़, मेंद्रथ, चकराता, नगोऊ समेत तीस गांवों में डीएनए सैंपल लिए हैं। टीम के वरिष्ठ वैज्ञानिक डा. हर्षवर्द्धन ने बताया कि घाटी में सभ्यता के विकास का पता लगाने के लिए सैंपलों को जांच के लिए हैदराबाद भेजा जाएगा। छह माह में रिपोर्ट आने के बाद सैंपलों को अन्य जगहों से एकत्र किए गए सैंपलों की रिपोर्ट से मिलाया जाएगा। जिसके बाद ही घाटी में सभ्यता के विकास का पता लग पाएगा।

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