
कुमारसैन (शिमला)। नारकंडा विकास खंड की ग्राम पंचायत जरोल में दो दिन तक चला तानु जुब्बड़ मेला शुक्रवार को धूमधाम से संपन्न हो गया। मेले के अंतिम दिन हजारों श्रद्धालुओं ने नाग देवता तानुजुब्बड़ खाचली और देवता चतुमुर्ख मैलन के दर्शन किए और आशीर्वाद लिया। वहीं, इस मौके पर यहां देवता के साथ आए देवलुओं ने जमकर नाटियां डालीं। शुक्रवार दोपहर बाद देवता चतुर्मुख अपने देवलुओं के साथ अपने निवास स्थान मैलन वापस लौटे। मेले को लेकर युवाओं में भी काफ ी उत्साह दिखा। इस दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन भी किया, जिसमें आसपास के स्कूलों के छात्रों ने रंगारंग कार्यक्रम पेश किए। जरोल पंचायत के प्रधान रतन मुख्यान ने बताया कि तानुजुब्बड़ में लगने वाला यह दो दिवसीय मेला क्षेत्र का ऐतिहासिक मेला है और कोटगढ़ खनेटी मैलन तथा थानाधार के लोगों के लिए साल में यह पहला अवसर होता है, जब देवता चतुर्मुख और नाग देवता के दर्शन लोगों को एक ही स्थान पर एक साथ होते हैं। मेले का यह स्थान रहोड़ू, जुब्बल, कोटखाई का केंद्र स्थान है। इस कारण यहां पर सैकड़ों की संख्या में लोग नाग देवता तथा देवता साहिब चतुर्मुख के दर्शन करने आते हैं। यही नहीं, नाग देवता के प्रांगण में एक प्राकृतिक झील भी है। झील के चारों ओर देवदार के पेड़ों का घना जंगल है जो झील की छवि को चार चांद लगा देते हैं। मान्यता है कि नाग देवता खाचली के प्रांगण में जो भी लोग आते हैं, उनकी मनोकामना पूर्ण हो जाती है। क्षेत्र में गर्मी के कारण लोगों की
फ सल भी नष्ट हो जाती है। अपनी फ सल को सूखे से बचाने के लिए भी लोग नाग देवता खाचली की शरण लेते हैं।
