
श्रीनगर: भारत-चीन के हुक्मरान चाहे कितने ही विवाद सुलझाने की बातें करें, लेकिन सच्चाई कुछ और ही है। चीन ने 15 अप्रैल तक लद्दाख के दौलत बेग ओल्डी क्षेत्र में न केवल 19 किलोमीटर तक घुसपैठ की थी, बल्कि भारतीय सीमा के पांच किलोमीटर भीतर तक सड़क भी बना ली थी। हालांकि, रक्षा मंत्रालय और लद्दाख स्वायत्त पर्वतीय विकास परिषद ने चीन द्वारा सड़क बनाए जाने से पल्ला झाड़ लिया है।
सूत्रों के मुताबिक चीन ने यह सड़क लद्दाख के पूर्वी छोर में सिरी जाप इलाके के अंतर्गत फिंगर-चार क्षेत्र में निर्मित की थी और यह एलएसी से भारतीय क्षेत्र में पांच किलोमीटर तक बनाई गई हैै। यह क्षेत्र दप्सांग मैदान का ही भाग है। जहां चीनी सैनिकों ने भारतीय सीमा में पांच तंबू गाड़ रखे थे।
भारतीय सैन्याधिकारियों ने जिस समय चीन के सैन्य अधिकारियों से 4 फ्लैग मीटिंग्स की थी उसी दौरान चीनी सैनिक पांच किलोमीटर लंबी सड़क को पक्का कर रहे थे। चीन इस इलाके को अक्साई चीन का हिस्सा बताता चला आ रहा है।
जब भारतीय सैनिक गश्त करते हुए एलएसी की तरफ जाते हैं तो उन्हें इस एरिये से गुजरना होता हैं। केंद्र सरकार भले दावा करे कि चीन के साथ लद्दाख में पैदा हुआ सैन्य गतिरोध दूर कर लिया गया है, लेकिन 17 मई को फिंगर-8 क्षेत्र में जा रहे भारतीय सैनिकों को चीन की आर्मी ने रास्ते में ही लौटने को कह दिया था। इसके बाद भारतीय गश्ती दल वापस लौट आया था। चीनी सैनिक उस समय भारतीय इलाके में ही थे।
इसके बाद सेना की 14वीं कोर ने चीन के साथ सटी वास्तविक नियंत्रण रेखा पर गश्त पर जाने वाले सभी सैन्यदलों को जाने से रोक दिया। इनमें दप्सांग मैदान में जाने वाला गश्तीदल भी था। इस मामले में लेह के जिला उपायुक्त सिमरनजीत सिंह और उत्तरी कमान के प्रवक्ता से संपर्क नहीं हो पाया है, लेकिन लद्दाख स्वायत्त पर्वतीय विकास परिषद के मुख्य कार्यकारी पार्षद रिग्जिन स्पालबर ने इस संदर्भ में कहा कि ऐसा कुछ नहीं है।
