
नूरपुर (कांगड़ा)। लगातार बढ़ रहे तापमान और सूखे ने लीची के बागवानों के होश उड़ा दिए हैं। लीची की फसल को तैयार होने के लिए अमूमन 25 से 28 डिग्री का तापमान चाहिए। लेकिन इस बार क्षेत्र में भीषण गर्मी के कारण पारा 45 के पार जा रहा है। इससे लीची की आधी फसल पर मौसम की मार बुरी तरह मार पड़ी है। वहीं नर्सरियों में पौधों की पनीरी भी सूखने लग पड़ी है। पारा बढ़ने से लीची की ग्रोथ पर असर पड़ रहा है।
लू के कारण लीची का साइज बढ़ने की बजाय फल फटना शुरू हो गया है। लीची की अच्छी ग्रोथ के लिए इन दिनों बारिश का होना बहुत जरूरी है। लेकिन बारिश न होने से बागवानों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। क्षेत्र के बागवान रमेश कुमार, आकाश, बबली, सुधीर तथा उपदेश कुमार का कहना है कि अपनी बागवानी का नुकसान देखकर वह काफी परेशान हैं। नूरपुर, इंदौरा, फतेहपुर तथा जवाली में इस समय 3500 हेक्टेयर भूमि पर लीची की खेती है। अकेले इंदौरा के मंड क्षेत्र, ठाकुरद्वारा, गगवाल, त्यौड़ा, बरोटा, इंदपुर, घंडरां, कंदरोड़ी, बाईदौरियां, चनौर, मलोट तथा इंदौरा के 1500 हेक्टेयर भूमि पर लीची के बाग हैं। लीची जून के अंत में पूरी तरह से तैयार होकर जुलाई में मार्केट में आना शुरू हो जाती है। बागों में लीची के दाम 35 से चालीस रुपए तक होते हैं। यह लीची बागों से चलकर मार्केट में 80 से 100 रुपए तक बिकती है।
नूरपुर व इंदौरा क्षेत्र में इस समय 452 लीची के बाग हैं। बागबानों की यह फसल सबसे महंगे दाम पर बाजार में बिकती है। लेकिन लगातार बढ़ रहे तापमान से बागवान काफी सकते में हैं। इस बारे में अतिक्ति विकास अधिकारी विशंभर दास का कहना है कि लीची की ग्रोथ के लिए सामान्य तापमान जरूरी होता है। लेकिन इस बार पारा अधिक है, जो लीची की फसल के लिए ठीक नहीं है।
विशेषज्ञों की राय
विशेषज्ञों की मानें तो उनका कहना है कि बागवान ड्रिप सिस्टम से लीची पर पानी का छिड़काव करें। इससे लीची पर गर्मी का असर कम पड़ेगा और लीची की ग्रोथ होना शुरू हो जाएगी। लेकिन बागवानों का कहना है कि पानी की कमी के कारण ऐसा छिड़काव संभव नहीं है।
