शिक्षा निदेशालय से जांच को पहुंचे अनुभाग अधिकारी

हमीरपुर-भोरंज। स्वामी विवेकानंद मेधावी छात्रवृत्ति योजना के तहत भोरंज स्कूल में पात्रता के बावजूद छात्रों को छात्रवृत्ति न मिलने के मामले में निदेशालय ने भी जांच शुरू कर दी है। शिक्षा निदेशालय से अनुभाग अधिकारी की जांच अधिकारी के रूप में तैनाती की गई है, जांच का कार्य भी शुरू कर दिया है। जांच अधिकारी ने वीरवार को उच्च शिक्षा उपनिदेशक कार्यालय से आवश्यक दस्तावेज हासिल किए, तत्पश्चात भोरंज स्कूल से दस्तावेज हासिल किए हैं। निदेशालय में भी दस्तावेजों की जांच की जाएगी, सारे तथ्यों को देखते हुए रिपोर्ट तैयार कर उच्च अधिकारियों को सौंप दी जाएगी। उच्च शिक्षा उपनिदेशक कार्यालय हमीरपुर ने मार्च माह में जांच के लिए अधिकारी की तैनाती करने का आग्रह किया था। वहीं उपनिदेशक कार्यालय हमीरपुर ने भी अपने स्तर पर जांच कर रिपोर्ट निदेशालय को भेजने की तैयारी कर ली है। संभावना है कि जल्द ही छात्रों को उनका हक मिल सकेगा। भोरंज स्कूल के छात्रों के हक के साथ खिलवाड़ के मामले, तथा शिक्षा विभाग की सुस्त प्रक्रिया को अमर उजाला ने 28 अप्रैल के अंक में छात्रों से छीना मेहनत का हक शीर्षक के तहत समाचार प्रकाशित कर उठाया था। आगामी तीन से चार दिनों में रिपोर्ट को तैयार कर उच्चाधिकारियों को सौंपे जाने की तैयारी है। रिपोर्ट के बाद स्पष्ट होगा कि किसकी लापरवाही से छात्रों को छात्रवृत्ति नहीं मिली। तथा शिक्षा विभाग अपने ही नियमानुसार संबंधित कर्मचारी से छात्रवृत्ति की राशि वसूल कर छात्रों को छात्रवृत्ति प्रदान करता है या नहीं।
उच्च शिक्षा उपनिदेशक आरसी तबयाल का कहना है कि शिक्षा निदेशालय से जांच के लिए अनुभाग अधिकारी की तैनाती हुई है। उन्होंने उपनिदेशक कार्यालय हमीरपुर तथा स्कूल से रिकार्ड हासिल किया है।

क्या था मामला
सामान्य वर्ग के मेधावी छात्रों को स्वामी विवेकानंद योजना के तहत 10 हजार रुपए की छात्रवृत्ति प्रदान की जाती है। वर्ष 2010 में घोषित दसवीं के परिणाम में भोरंज स्कूल की छात्रा शैलजा पठानिया ने 87 प्रतिशत, दीपिका कुमारी ने 85.5 प्रतिशत, रंजना देवी ने 83.5 प्रतिशत अंक प्राप्त किए थे। लेकिन उन्हें छात्रवृत्ति नहीं मिल पायी। जबकि जिला हमीरपुर में ही उनसे कम प्रतिशत अंक (81.57 प्रतिशत) हासिल करने वाले बच्चों को छात्रवृत्ति मिल गई। छात्रों की अनदेखी को लेकर शैलजा के पिता ने दिसंबर माह में शिकायत की थी, जिस पर कोई हरकत नहीं हो रही थी।

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