
शिमला। हिमाचल के सेब उत्पादक क्षेत्र के लिए लाइफ लाइन माने जाने वाली ठियोग-हाटकोटी सड़क का काम अब दो हिस्सों में बांटकर पूरा होगा। विश्व बैंक ने इस प्रोजेक्ट की संशोधित लागत 303 करोड़ तय की है। ठियोग से खड़ापत्थर तक 48 लंबा एक हिस्सा और खड़ापत्थर से हाटकोटी तक 32 किलोमीटर दूसरा हिस्सा। ठियोग से खड़ापत्थर तक सड़क को डबल लेन करने के लिए टेंडर खुल गए हैं। इस पहले हिस्से की लागत करीब 175 करोड़ रुपये होगी। इसी सड़क से राज्य के कुल सेब उत्पादन का 60 फीसदी हिस्सा बाजार में पहुंचाया जाता है।
दूसरे हिस्से के टेंडर भी जल्द खुलने वाले हैं। इससे पहले वर्ष 2008 में करीब 80 किलोमीटर लंबी इस सड़क का काम विश्व बैंक की ओपन टेंडरिंग से चीन की कंपनी लोंगजियान ने लिया था। लेकिन काम में देरी, लागत बढ़ने और लोगों का विरोध बढ़ने के बाद 2012 में राज्य सरकार ने यह एमओयू रद कर दिया था। इसके बाद इसके लिए नए सिरे से टेंडर जारी करने की अनुमति विश्व बैंक से मांगी गई थी, जो अब मिल गई है।
दो साल का रखा है टारगेट : चौहान
लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता प्रदीप चौहान ने बताया कि यह सड़क सेब उत्पादक क्षेत्र के लिए बेहद अहम है। बेशक विश्व बैंक ने दोबारा टेंडर की प्रक्रिया शुरू कर दी है, लेकिन सड़क पर खुदाई का काम इस बार सेब निकालने के बाद शुरू होगा। इससे पहले हम केवल मेटलिंग का ही काम करेंगे। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार इस सड़क को जल्द से जल्द बनाने के लिए प्रयासरत है। लोक निर्माण विभाग ने भी इसके लिए दो साल का टारगेट रखा है।
