
नाहन (सिरमौर)। ट्रिपल राइडिंग के विरुद्ध अभियान को बुद्विजीवियों ने जीवन से जुड़ी अहम मुहिम बताया है। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि पुलिस किसी भी बिगडै़ल युवा को बाइक मुहैया नहीं कराती। बाइक अभिभावक ही मुहैया कराते हैं। अभिभावकों को समझना चाहिए कि वास्तव में उनके औलाद की जरूरतें क्या है। मगर ऐसा नहीं होता। कुछ अभिभावक पैसे की धौंस में अपने बिगड़ैल साहबजादों की हर फरमाइश को पूरा कर रहे हैं। कच्ची उम्र तथा पढ़ाई लिखाई के समय में कई बच्चों को बाइक तोहफे में दी जा रही है। ऐसे में ट्रिपल राइडिंग ही होगी। नाहन शहर में इस समय तकरीबन 1200 से अधिक बाइकें मौजूद हैं। जिन्हें देर शाम तक विभिन्न गलियों तथा शहर के अन्य क्षेत्रों में मात्र युवा ही दौड़ा रहे हैं।
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अभिभावकों को अपने बच्चों की अहम जरूरतों को समझना होगा। बिना किसी ठोस वजह के उन्हें भारी भरकम वाहन सौंपना समझदारी नहीं है। पुलिस निश्चित तौर पर ट्रिपल राइडिंग मामले में सख्त हो सकती है। मगर वह दिनों दिन बढ़ रही दोपहिया वाहनों को बढ़ने से नहीं रोक सकती। अभिभावक पुलिस के साथ सहयोग कर इस अभियान को सफल बना सकते हैं।
डा. राजीव बिंदल, विधायक, नाहन,
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ट्रिपल राइडिंग अभियान का विरोध किसी एक से जुड़ा नहीं है। यह हर मनुष्य के जीवन से जुड़ा है। सभी अपनों की सुरक्षा चाहते हैं। एक बाइक या स्कूटर पर तीन सवारियां कतई ठीक नहीं। इस अभियान को सहयोग करने में हम सभी की सुरक्षा पुख्ता हो सकती है।
– ज्योति राणा, एसडीएम, नाहन
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दोपहिया वाहनों की दुर्घटनाओं को रोकना हम सब के हाथ में है। हम चाहें तो यातायात के नियमों का पालन कर सकते हैं। पुलिस सुझाव दे सकती है। अभिभावक घर बैठे ट्रिपल राइडिंग के नुकसान को अपने बच्चों से शेयर कर सकते हैं। अमर उजाला का अभियान किसी एक के लिए नहीं बल्कि पूरे समाज के लिए है।
– एसएस राठी, निदेशक, कैरियर अकादमी
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मुद्दा मात्र ट्रिपल राईडिंग का नहीं है। इसके पीछे छिपे भयानक सच को समझना होगा। छोटे से दोपहिया वाहन में तीन सवारियों का बैठना घातक है
