ये कैसी आपातकाल निशुल्क चिकित्सा सेवा

शिमला। आपात स्थिति में आईजीएमसी अस्पताल आने वाले मरीजों के लिए शुरू की गई चौबीस घंटे निशुल्क स्वास्थ्य सेवा केवल नाम की ही रह गई है। सरकारी आदेश फाइलों तक सिमट कर रह गए हैं। अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में आने वाले मरीजों को फ्री जीवन रक्षक दवा तक नहीं मिल रही है, टेस्ट तो दूर की बात है। सभी तरह के टेस्टों के लिए मरीज के तीमारदारों को पैसे भरने पड़ रहे हैं। ऐसे में इस योजना की हवा निकल गई है। आईजीएमसी में ब्लड टेस्ट, एक्सरे, अल्ट्रासाउंड , सीटी स्कैन और एमआरआई सभी के पैसे भरने के बाद ही टेस्ट होते हैं। हालांकि इसमें दावा किया गया था कि इस योजना के तहत हर श्रेणी के लोगों को फायदा मिलेगा, लेकिन करनी और कथनी में दिन रात का अंतर हैं।
इस योजना के तहत अस्पताल पहुंचने पर पहले चौबीस घंटे में हर मरीज को निशुल्क उपचार करने का दावा किया गया था, लेकिन मौजूदा समय में आईजीएमसी में यह योजना पूरी तरह से लागू नहीं हो पाई है। योजना को चलाने का मकसद हर श्रेणी के लोगों को फायदा देना था। कोई भी व्यक्ति अचानक बीमार हो जाए या हादसे में घायल होकर अस्पताल पहुंचे तो पहली प्राथमिकता मरीज को बचाने की होनी चाहिए। जल्दबाजी में कई मर्तबा लोग पैसा लेकर अस्पताल नहीं आते, जिस परिवार का सदस्य घायल हुआ हो सूचना सुनकर जिस स्थिति में तीमारदार होते हैं वैसे ही अस्पताल की तरफ भागते हैं। लोगों को कोई परेशानी न हो इसके लिए यह निर्णय लिया गया था कि अस्पताल पहुंचने पर पहले चौबीस घंटे इलाज फ्री होगा। इसके बाद से इलाज पर आने वाला खर्च का बिल मरीज को भरना होगा।

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इस बारे में स्पष्ट निर्देश नहीं : एमएस
आईजीएमसी के वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक डा. रमेश ने कहा कि सरकार की ओर से इस बारे में स्पष्ट निर्देश नहीं हैं। अस्पताल में केवल कैंसर रोगियों, हेल्थ कार्ड धारकों और जो मरीज बेसहारा होता है उनका उपचार और टेस्ट निशुल्क होता है। बाकी मरीजों से टेस्ट की फीस ली जा रही है।

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