
शिमला। राजधानी की स्मार्ट पुलिस रसूखदारों पर रहम और गैरों पर सितम के फार्मूले पर काम कर रही है। ऐसा ही एक वाक्या वीरवार सुबह आईजीएमसी के नजदीक घटा। शिकायतकर्ता के दावे पर यकीन करें तो उसे वीरवार का दिन शायद ही जिंदगी में कभी भूले। धर्मेंद्र शर्मा बड़ा गांव कसुम्पटी के रहने वाले हैं। इनके पिता जगदीश शर्मा अधरंग के मरीज हैं। सुबह करीब साढ़े दस बजे वे कार नंबर एचपी 01-3300 में आईजीएमसी के नजदीक पहुंचे लेकिन आगे ट्रैफिक जाम होने की वजह से गाड़ी को आईजीएमसी के नाले में खड़ा कर दिया। अपना संपर्क नंबर गाड़ी में छोड़कर पिता को पीठ पर उठाकर वे अस्पताल चले गए। इनके साथ मौजूद एक तीमारदार ने बताया कि इसके कुछ ही देर बाद फोन पर सूचना मिली कि क्रेन आपकी गाड़ी को उठाकर ले गई है। एक बेटा पहले से ही अपने पिता की बीमारी को लेकर परेशान है और अस्पताल में भाग दौड़ कर रहा है। उस पर कार पुलिस उठा ले गई। अस्पताल में डाक्टरों से स्वास्थ्य जांच करवाने के बाद गाड़ी को पुलिस कब्जे से छुड़वाने के लिए जब कच्चीघाटी पहुंचे तो उन्हें 2250 रुपये भरने को कहा गया। पैसा भरने के बाद ये गाड़ी को वापस ले आए।
उधर , इस बारे में डीएसपी ट्रैफिक पुनीत रघु ने कहा कि यह कार टैक्सी नंबर है। जिस जगह कार खड़ी की गई थी वहां पार्किंग स्थल नहीं है। टैक्सी चालक को गाड़ी में होना चाहिए था। ऐसा कोई क्लू गाड़ी में नहीं था जिससे इस बात का पता चलता कि गाड़ी मरीज को लेकर आई है। टैक्सी नंबर होने के कारण इसमें चालक का होना जरूरी था। वह क्यों गाड़ी छोड़ कर गया?
प्रतिबंधित सड़क पर खड़ी रहती हैं गाड़ियां
आईजीएमसी रोड प्रतिबंधित सड़क में आता है। यहां रोजाना वीआईपी और प्रभावशाली लोगों की गाड़ियां खड़ी होती हैं। नियमों की बात करें तो ऐसा करने वालों को 1500 रुपये जुर्माने का प्रावधान है। लेकिन एक नजर से सब पर ट्रैफिक पुलिस कानून लागू नहीं कर पा रही। वीआईपी की गाड़ी क्रेन से नहीं उठाई जाती जबकि धर्मेंद्र जिस गाड़ी में आया था वह आईजीएमसी के नाले में खड़ी थी।
