
शिमला। हिमाचल में सड़क हादसों की बढ़ती रफ्तार के बावजूद अस्पतालों में न्यूरो सर्जन की व्यवस्था नहीं। केवल आईजीएमसी में दो न्यूरो सर्जन थे, जिनमें से एक ने नौकरी छोड़ दी है। सड़क हादसों में प्रदेश भर से हेड इंजरी के सभी मरीजों को आईजीएमसी रेफर किया जाता है लेकिन क्या अब एक न्यूरो सर्जन के सहारे सभी का उपचार संभव हो सकेगा।
विभाग में प्रोफेसर और एसोसिएट प्रोफेसर के पद खाली हैं। एक न्यूरो सर्जन को रेजिडेंट डाक्टर काम चलाने के लिए दिए हैं, जिनकी सेवाएं छह माह बाद समाप्त हो जाएगी। मौजूदा समय में न्यूरो सर्जरी विभाग में एकमात्र न्यूरो सर्जन हैं। इन्हें ओपीडी भी चलानी है और आपरेशन थियेटर को भी देखना है। इनके पास छह रेजिडेंट डाक्टर और दो पीजी स्टूडेंट हैं। चौबीस घंटे अपनी सेवाएं देना एकमात्र न्यूरो सर्जन के लिए मुमकिन नहीं। हेड इंजरी के हर माह औसतन दो सौ दस मरीज यहां पहुंचते हैं।
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न्यूरो सर्जन की नर्सरी अब नहीं होगी तैयार
शिमला। आईजीएमसी ने सुपर स्पेशेलिटी न्यूरो सर्जरी में एमसीएच कोर्स करवाने की योजना बनाई ताकि कालेज में ही न्यूरो सर्जन तैयार किए जाएं। मेडिकल काउंसिल आफ इंडिया के नियमों के तहत इसके लिए विभाग में दो प्रोफेसरों का होना लाजमी है। लेकिन एक प्रोफेसर डा. केएस राणा के नौकरी छोड़ने के बाद योजना भी खटाई में पड़ गई है। डा. राणा आईजीएमसी में वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक के पद पर भी तैनात थे लेकिन सत्ता बदलने के बाद उन्हें इस पद से हटा दिया गया। लिहाजा, उन्होंने आईजीएमसी और प्रदेश को अलविदा कहते हुए दूसरे राज्य में एक निजी मेडिकल कालेज में ज्वाइन कर लिया।
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सरकार को कर दिया है आगाह : प्रिंसिपल
आईजीएमसी के प्रिंसिपल प्रोफेसर एसएस कौशल ने कहा कि न्यूरो सर्जन डा. केएस राणा यहां से चले गए हैं। अब एकमात्र न्यूरो सर्जन डा. आरसी ठाकुर हैं। इस वजह से एमसीएच का कोर्स भी शुरू होने से पहले ही लटक गया है। समस्या गंभीर है। सरकार को इस बारे में अवगत करवा दिया गया है और रिक्त पदों को भरने का आग्रह भी किया गया है।
