
कुमारसैन (शिमला)। शिमला जिले के नारकंडा और इसके आसपास के क्षेत्रों में सेब पर पैल्ट केटर पिल्लर नामक कीट ने हमला बोल दिया है। इस रोग से बगीचों में पौधों की पत्तियां मुरझा कर गिर रही हैं। इससे बागवानों को अपनी फसल को लेकर चिंता सताने लगी है।
नारकंडा और एकांतबाड़ी समेत कई अन्य स्थानों पर इस रोग के लक्षण नजर आने लगे हैं। कीट के प्रकोप से पहले पत्तियों में ऐंठन आती है और फिर धीरे-धीरे मुड़कर गोल होती हैं। इसके अंदर कीड़ा भी नजर आता है। बाद में पत्तियां मुरझा कर जमीन पर गिर जाती हैं। बागवान नारायण कैंथला के मुताबिक इस कीट का हमला कई बगीचों में देखा गया है। इससे बागवान खासे चिंतित हैं। अगर इस पर समय पर अंकुश नहीं लगाया गया तो बागवानों को अच्छी फसल से हाथ धोना पड़ सकता है। पत्तियां समयपूर्व गिरने का सीधा असर फल विकास और गुणवत्ता पर पड़ता है। यानी पत्तियां झड़ने के कारण फलों का आकार बढ़ना रुक जाता है और ऐसे में फल छोटे ही रह जाएंगे। इससे बागवानों का आर्थिक नुकसान तय है।
वैक्टीरियल फंगीसाइड को करें इस्तेमाल
जैविक खेती पर काम कर रही संस्था के विशेषज्ञ डा. आरएस मिन्हास का कहना है कि पथरीली जमीन पर लगे बगीचों में इस तरह का कीट पनपता है। कीट फंगस तैयार कर पत्ते को अपने साथ लपेट लेता है, बाद में पत्ता कमजोर होकर गिर जाता है। उन्होंने बताया कि इस कीट को खत्म करने के लिए बागवान किसी भी वैक्टीरियल फंगीसाइड को इस्तेमाल कर सकते हैं। जबकि, जैविक विधि से उत्पादन कर रहे बागवान बबोरियल बासियाना पांच मिली प्रति लीटर में मिलाकर पौधों पर छिड़काव करेंगे तो लाभ अवश्य होगा।
