
नई दिल्ली: राजस्व प्राप्ति बढ़ाने के प्रयासों के तहत वित्त मंत्रालय ने इस साल जनवरी से मार्च के दौरान सीमा शुल्क और सेवा कर चोरी के 400 करोड़ रुपए के मामले पकड़े हैं। आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि राजस्व विभाग के तहत दो प्रमुख वित्तीय खुफिया एजेंसियों केंद्रीय उत्पाद खुफिया महानिदेशालय (डीजीसीईआई) तथा राजस्व खुफिया महानिदेशालय (डीआरआई) ने 2,300 संदिग्ध बैंकिंग लेनदेन का पता लगाया है जिसके बाद ये मामले पकड़ में आए।
वित्तीय खुफिया इकाई-भारत (एफआईयू) ने साल के पहले तीन महीनों में डीजीसीईआई को 1,443 संदिग्ध लेन-देन तथा डीआरआई को 904 संदिग्ध लेनदेन (एसटीआर) की जानकारी दी। एफआईयू को संदिग्ध लेनदेन की सूचना जुटानी होती है और उसका विश्लेषण करना होता है। सूत्रों ने बताया कि इन एसटीआर के जरिए डीजीसीईआई ने 50 करोड़ रुपए की कर चोरी का पता लगाया और 28 करोड़ रुपए की वसूली की।
वहीं दूसरी ओर डीआरआई ने विभिन्न आयातकों और निर्यातकों द्वारा जाली चालान के जरिए बैंकिंग चैनल से 350 करोड़ रुपए के लेनदेन का पता लगाया और 1.16 करोड़ रुपए की वसूली की। संदिग्ध नकदी लेन-देन (सीटीआर) के बारे में मिली खुफिया सूचनाओं के आधार पर डीआरआई ने 400 करोड़ रुपए के शुल्क मुक्त आयात की वस्तुओं को इधर-उधर किए जाने का मामला भी पकड़ा। इन मामलों में अधिकारियों ने 17 करोड़ रुपए की नकदी वसूली।
एसटीआर और सीटीआर दोनों लेन-देन 10 लाख रुपए से अधिक के होते हैं और समझा जाता है कि इसमें से कुछ धन मादक पदार्थों की तस्करी तथा कालेधन से जुड़ा होता है। सूत्रों ने बताया कि ये एजेंसियां छूट संबंधी अधिसूचनाओं के दुरुपयोग तथा आयात मूल्य को कम आंकने के मामले जिनमें करोड़ों रुपए की सीमा शुल्क चोरी के मामले हैं, उन्हें देख रही हैं। इसके अलावा डीआरआई और डीजीसीईआई की निगाह ऐसी आयात या निर्यात फर्मों पर भी है जो कथित रूप से मनी लांड्रिंग और कर चोरी में शामिल हैं।
दोनों एजेंसियों ने पिछले साल अक्तूबर से दिसंबर के दौरान अप्रत्यक्ष कर चोरी के 2,600 करोड़ रुपए के मामलों का पता लगाया था। वहीं 1,700 करोड़ रुपए की सेवा कर चोरी के मामले सामने आए। इसके साथ ही सीमा शुल्क चोरी के 701.17 करोड़ रुपए के और केंद्रीय उत्पाद शुल्क की 268.80 करोड़ रुपए की चोरी का पता चला।
