
शिमला। नॉन पीएफए लाइसेंस बनाने से राजधानी के कारोबारियों ने इंकार कर दिया है। आरोप हैं कि नगर निगम बिना किसी नियम के कारोबारियों से अवैध वसूली कर रहा है। अगर कोई नया कानून बनाया गया है तो उसके लिए कारोबारियों से सुझाव और आपत्तियां क्यों नहीं मांगी गई। व्यापार मंडल शिमला ने सभी कारोबारियों से नॉन पीएफए लाइसेंस न बनवाने का आह्वान किया है। इस मामले को व्यापार मंडल के पदाधिकारी निगम आयुक्त के समक्ष उठाएंगे।
कारोबारियों का कहना है नगर निगम मनमर्जी चलाते हुए अवैध वसूली कर रहा है। अपनी सुविधा के अनुसार बायलॉज बनाकर कारोबारियों पर थोपे जा रहे हैं। इन बायलॉज को बनाने के लिए किसी भी कारोबारी से सुझाव और आपत्ति नहीं मांगी है। बाजार में पर्चे बांट कर कारोबारियों को एक साथ पांच साल के नॉन पीएफए लाइसेंस बनाने के निर्देश दे दिए हैं। जुर्माने की निर्धारित की गई राशि भी भारी भरकम है। नगर निगम के इस तुगलकी फरमान को नहीं माना जाएगा।
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कारोबारियों में भारी रोष : रमेश
व्यापार मंडल शिमला के अध्यक्ष रमेश सूद का कहना है निगम के इस फरमान से कारोबारियों में भारी रोष है। नया नियम बनाने से पूर्व कारोबारियों से सुझाव और आपत्तियां मांगनी चाहिए थी। कारोबारी एकजुट होकर निगम के खिलाफ मोर्चा खोलने को तैयार है।
एमसी नहीं बना सकता लाइसेंस : इंद्रजीत
व्यापार मंडल के महासचिव इंद्रजीत सिंह ने कहा इस मामले के हल होने तक सभी कारोबारियों को लाइसेंस नहीं बनाने को कहा गया है। 1995 में इस मामले में कोर्ट में हुई सुनवाई कारोबारियों के पक्ष में है। नॉन पीएफए लाइसेंस बनाने का नगर निगम को कोई अधिकारी नहीं है।
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बात कर सुलझाएंगे मामला : नरेश
नगर निगम के सहायक आयुक्त नरेश ठाकुर का कहना है कारोबारियों के साथ बातचीत कर इस मसले को सुलझा लिया जाएगा।
