वार्डों में स्ट्रीट लाइटों का बुराहाल

शिमला। राजधानी में खराब स्ट्रीट लाइटों ने लोगों की दिक्कत बढ़ा दी है। कहीं लाइटें टूटी हुई हैं तो कहीं जलती ही नहीं। लोक सेवा के लिए बेस्ट सिटी का अवार्ड लेने वाले शिमला शहर में करीब 1100 स्ट्रीट लाइटें खराब हैं। बिजली कंपनी की लापरवाही का खामियाजा हजारों लोगों को रात के समय अंधेरी सड़कों से गुजरते समय भुगतना पड़ रहा है। नगर निगम हर माह बिजली कंपनी को स्ट्रीट लाइटों की मरम्मत के लिए पैसा भी समय से जारी कर रहा है पर स्ट्रीट लाइटों को दुरुस्त नहीं किया जा रहा है। नगर निगम का एक भी पार्षद शहर में स्ट्रीट लाइटों की हालत से संतुष्ट नहीं। अनाडेल से पूर्व पार्षद प्रदीप कश्यप तो इस बाबत धरना दे चुके हैं जबकि ढली के पार्षद शैलेंद्र चौहान अनशन करने की तैयारी में हैं।
बीस प्रतिशत प्वाइंट नान फंक्शनल
नगर निगम के तहत आने वाले पच्चीस वार्डों में 5600 के करीब स्ट्रीट लाइटों के प्वाइंट हैं। इनमें से 20 प्रतिशत लाइटें नान फंक्शनल हैं। यानी 1100 के करीब शहर में स्ट्रीट लाइटें बंद हैं। भराड़ी, रुलदूभट्टा, कैथू, समरहिल, टुटू, बालूगंज, टुटीकंडी, फागली, कृष्णानगर, जाखू, ढली, कनलोग, चम्याणा, मल्याणा, कसुम्पटी, संजौली, छोटा शिमला पटयोग और खलीनी वार्ड के लोगों को खराब स्ट्रीट लाइटों से अधिक परेशानी झेलनी पड़ रही है।
सिर्फ माल रोड नहा रहा दूधिया रोशनी से
माल रोड से लेकर मुख्यमंत्री आवास और डीसी आफिस से चौड़ा मैदान तक के मार्ग को दूधिया रोशनी से चमकाकर नगर निगम और बिजली कंपनी ने शहर के अन्य हिस्सों में रहने वाले लोगों को कई वर्षों में केवल सब्जबाग दिखाए हैं। धरातल पर हालात कुछ और ही हैं।

रखरखाव का जिम्मा बिजली कंपनी के पास
नगर निगम के पच्चीस वार्डों में लगी स्ट्रीट लाइटों की देखरेख का जिम्मा बिजली कंपनी देख रही है। लाइटों की मरम्मत और रखरखाव पर प्रति माह कंपनी को नगर निगम द्वारा करीब तीन लाख की राशि दी जाती है। बिजली की मासिक खपत का खर्च करीब बारह लाख के करीब है। इतना खर्च करने के बावजूद भी शहर में अधिकांश स्ट्रीट लाइटें खराब हैं।

समय पर जमा करवाते हैं राशि : आयुक्त
नगर निगम आयुक्त अमरजीत सिंह का कहना है कि बिजली कंपनी को स्ट्रीट लाइटों के मासिक बिल के साथ मरम्मत की राशि अदा की जाती है। खराब पड़े प्वाइंट्स की हर जानकारी बिजली कंपनी के अधिकारियों को समय-समय पर दी जाती है। लाइटों की संख्या अधिक होने के चलते मरम्मत में कुछ देरी जरूर होती है। इस प्रक्रिया को दुरुस्त करने के लिए बिजली कंपनी प्रबंधन से बात की जाएगी।

कई प्रकार की लाइटें लगाने से समस्या : विशेषवर
बिजली कंपनी के अधिशासी अभियंता सिटी डिविजन विशेषवर शर्मा का कहना है कि फरवरी और मार्च में करीब चालीस लाख की राशि खर्च कर स्ट्रीट लाइटों की मरम्मत की गई है। शहर में कई प्रकार की लाइटें लगी हुई हैं, जिसके चलते कुछ लाइटें दुरुस्त नहीं हो पाई हैं। इन लाइटों को ठीक करने के लिए अलग सामान खरीदने की आवश्यकता है। उच्च अधिकारियों को इससे अवगत करवा दिया है।

Related posts