
शिमला। सेब उत्पादक क्षेत्रों में ओलावृष्टि के कारण फसल को भारी नुकसान पहुंचा है। शनिवार दोपहर करीब 1:55 पर हुई ओलावृष्टि के कारण देहा-चौपाल, ठियोग-कोटखाई व नारकंडा-कुमारसैन क्षेत्रों में सेब की फसल प्रभावित हुई है। मड़ावग, बखोल व नारकंडा में सेब की फसल बुरी तरह प्रभावित हुई है। सेब उत्पादक क्षेत्रों में पांच मिनट तक लगातार बारिश और ओलावृष्टि हुई है। ओलावृष्टि से सेब के छोटे दानों के अलावा पौधों के पत्ते कट गए हैं। बखोल (कोटखाई) निवासी अनंतराम चौहान ने बताया कि सेब का आकार करीब अखरोट जितना हो गया है। ऐसे में ओलों के कारण फल बुरी तरह खराब हुआ है। राजीव चौहान ने बताया कि ओलों से पेड़ के पत्ते कट गए हैं, जिस कारण सेब की क्वालिटी पर बुरा प्रभाव पड़ने की संभावना है। कैलाश चौहान व अनिल चौहान का कहना है कि ओलावृष्टि के कारण फसल बुरी तरह प्रभावित हुई है। चौपाल निवासी राजीव राजटा, हितेंद्र व अंशुल चौहान ने बताया कि ओलावृष्टि से फसल को नुकसान पहुंचा है। नारकंडा, एकांत बाड़ी, कनार, मधावनी व बतनाल में ओलावृष्टि के कारण सेब की फसल प्रभावित हुई है। बागवानों ने ओलों से सेब की फसल को हुए नुकसान को कम करने के लिए आवश्यक दवाएं उपलब्ध करवाने की मांग की है।
थोड़ी देर हाटू ने ओढ़ी सफेद चादर
शिमला। शनिवार दोपहर हुई ओलावृष्टि के बाद हाटू पीक ने सफेद चादर ओढ़ ली है। करीब पांच से दस मिनट तक हुई भारी ओलावृष्टि के कारण हाटू में ओलों की सफेद परत जम गई। नारकंडा पहुंचे सैलानियों ने भी मौसम का जमकर लुत्फ उठाया।
