
रोहड़ू। सेब की अच्छी पैदावार के संकेत मिलते ही पोषक तत्व के नाम पर दवा कंपनियों के एजेंट गांव-गांव पहुंचने लगे हैं। बागवानों को पोषक तत्व के नाम पर विक्रेता अप्रमाणित उत्पाद बेचकर खूब चांदी कूट रहे हैं। बागवानी विशेषज्ञों ने बागवानों को पोषक तत्व के नाम पर बिक्री कर रहे एजेंटों से बचने की सलाह दी है।
फ्रूट सेटिंग के बाद सेब के लिए पोषक तत्व बेचने वाले एजेंट गांव-गांव पहुंच रहे हैं। बागवानों से एक लीटर टानिक के दाम पांच सौ रुपये से दो हजार तक वसूल किए जा रहे हैं। प्रदेश उद्यान विभाग की ओर से इन उत्पादों को प्रमाणित नहीं किया गया है। बागवानों को झांसा देने के लिए कई कंपनियों ने सेवानिवृत्त विशेषज्ञ व पूर्व अधिकारियों को सलाह देने के लिए रखा है। इस पर सरकार की ओर से भी अभी तक कोई पहल नहीं है। उद्यान विभाग की ओर से बनाई गई छिड़काव सारिणी में भी किसी टानिक के छिड़काव का जिक्र नहीं है। उद्यान विकास अधिकारी आग्रदास का कहना है कि उद्यान विभाग की ओर से बिना आवश्यकता किसी प्रकार के पोषक तत्व के छिड़काव की सिफारिश नहीं है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों से इस प्रकार सेब के टानिक के नाम पर लोगों को गुमराह करने की सूचनाएं मिल रही हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे एजेंटों के चंगुल में बागवान न आएं। गलत दवाइयों या गलत पोषक तत्व के छिड़काव से फल तथा पौधे दोनों को नुकसान की संभावना रहती है। उन्होेंने बागवानों को सलाह दी है कि पौधे में तने के चारों ओर घास की परत बिछाएं। इससे जमीन में नमी बनी रहेगी।
