
नाहन (सिरमौर)। राज्य स्वास्थ्य निदेशालय ने उन आदेशों की अवहेलना पर कड़ा संज्ञान लिया है जिनके तहत जिलों के विभिन्न स्वास्थ्य मुख्यालयों तथा स्वास्थ्य केंद्रों पर मरीजों की सुविधा के लिए आरओ स्थापित नहीं किए गए हैं। मरीजों को संक्रमण से बचाने के लिए तथा शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए राज्य के 70 फीसदी से अधिक स्वास्थ्य केंद्रों में आरओ अर्थात शुद्ध पेयजल दिलाने वाले उपकरण नहीं लगाए गए हैं। पूर्व में दिसंबर 2012 में राज्य के सभी जिला मुख्यालयों में संबधित मुख्य चिकित्साधिकारियों को इस बाबत स्वास्थ्य निदेशालय शिमला की ओर से आदेशों की प्रति जारी की गई थी।
आदेशों में साफ लिखा गया था कि सभी स्वास्थ्य केंद्रों में एक्सरे परिसर, लैबरोटरी, ओपीडी सहित महिला तथा शिशु वार्डों में वाटर फिल्टर आरओ स्थापित किए जाएं। मगर इस आदेश का कहीं भी ठीक ढंग से पालन नहीं किया गया। अकेले जिला में ही सिविल अस्पताल नाहन सहित ददाहू, राजगढ़, पांवटा तथा शिलाई जैसे बड़े स्वास्थ्य केंद्रों में भी आरओ ठीक ढंग से स्थापित नहीं किए गए।
हालत ये हैं कि आज मरीजों को शुद्ध पेयजल तो छोड़िए कई बार पीने का पानी तक ठीक ढंग से उपलब्ध नहीं हो पाता। नाहन चिकित्सालय में ही आधे से अधिक वार्डों तथा चिकित्सा परिसरों में आरओ ढूंढे नहीं मिल रहे। स्वास्थ्य प्रशासन ने जहां आरओ स्थापित किए हैं उनमें से कई या तो खराब चल रहे हैं या फिर उनमेें पानी नियमित रूप से नहीं डाला जा रहा।
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आरओ है मरीजों के लिए बेहद आवश्यक
नाहन (सिरमौर)। मरीजों को उपलब्ध होने वाला आम पानी शुद्धता की तरफ से संवेदनशील है। पीने के पानी में लंबे समय से लोह तत्व, क्लोराइड, कठोरता, उचित क्लोरीन, पीएच मान की मात्रा अव्यवस्थित बनी हुई है। पेयजल में मौजूद जीवाणुओं की मौजूदगी को हटाने के लिए आईपीएच तथा स्वास्थ्य विभाग अपने अपने तरीके से काम कर रहे हैं। बावजूद इसके संवेदनशीलता बनी हुई है।
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‘‘पूर्व में स्वास्थ्य निदेशालयों के आदेशों पर किस तरह का काम हुआ है। यह रिपोर्ट मांगी जा रही है। इसके अलावा स्वास्थ्य केंद्रों में आरओ तथा शुद्ध पेयजल की क्या व्यवस्था है इस बारे भी जानकारी मांगी जाएगी। ऐसे कार्यों के लिए आरकेएस के तहत जिला स्वास्थ्य केंद्रों को बजट जारी किया जा चुका है। ’’
– डा. कुलभूषण सूद, राज्य निदेशक, स्वास्थ्य
