शिमला शहर में एक कॉल पर बंट रही ‘मौत’

शिमला। शिमला शहर में दर्जनों डिलीवरी ब्वॉय युवाओं को महज एक कॉल पर ‘मौत’ बांट रहे हैँ। नशे की गिरफ्त में फंसे एक युवक की मदद से शहर में चल रहे इस नेटवर्क के बारे में पता लगाया। इस दौरान चौंकाने वाली बातें पता चलीं। नशेड़ी युवक नशे के लिए जिस सिरप का इस्तेमाल करते हैं, उसका कोड वर्ड ‘शॉट’ है। नशीली गोलियां लेनी हों तो ‘पत्ते’ की डिमांड दी जाती है। पूरे शहर में यह नेटवर्क फैला हुआ है। नशा बेचने वाले इन गुर्गों के पास नशीली दवाओं के अलावा चरस का भी स्टॉक रहता है। इस काले कारोबार को चलाने वाले माफिया ने पिज्जा ब्वॉय की तर्ज पर गुर्गे रखे हैं। वे डिमांड आते ही बताई गई जगह पर उपलब्ध हो जाते हैं। सारा काला कारोबार मोबाइल पर चलता है।
नशे के आदी हो चुके 12 साल के एक युवक ने शुक्रवार को दोपहर दो बजे नशे के डिलीवरी ब्वॉय के मोबाइल फोन पर कॉल की। फिर दोनों मे बात शुरू हुई।
युवक डिलीवरी ब्वॉय से बोला… तीन पत्ते और तीन शॉट चाहिए। डिलीवरी ब्वॉय…मिल जाएगा लेकिन अब रेट बढ़ गया है। पुलिस की सख्ती है और यहां माल मिलता नहीं। एक शॉट के अब 150 और एक पत्ता 200 में मिलेगा। पैसा देगा तभी आऊंगा। युवक… ठीक है दोबारा फोन करके बताता हूं।

अभिभावक आगे आएं : एसपी
प्रतिबंधित दवाओं का सेवन करने वाली की संख्या शहर में काफी है। नशे का सेवन करने वाले काले कारोबार में ग्राहक भी हैं और व्यापारी भी। इनकी मात्रा काफी कम होती है। मांग के मुताबिक ये नशे का सामान आसानी से उपलब्ध करवा देते हैं। पुलिस ने ऐसे कई मामले पकड़े हैं। शहर भर में फैले इस नेटवर्क को तोड़ने के लिए अभिभावकों को आगे आना चाहिए। युवा भी समझें कि यह ‘जहर’ वे क्यों खा रहे हैं।

यहां से आ रही हैं प्रतिबंधित दवाएं
शिमला शहर में प्रतिबंधित दवाओं की खरी-फरोख्त पर शिकंजा नहीं कसा जा सका है। हालांकि, पुलिस और स्वास्थ्य विभाग कोशिश करते हैं लेकिन यह पर्याप्त नहीं है। पड़ोस के हरियाणा और पंजाब से नशीली दवाओं की तस्करी हो रही है। शिमला शहर में चरस ऊपरी शिमला और कुल्लू से आ रही है।

अभिभावक इन बातों पर रखें नजर…..
बच्चे का अकेले रहने की जिद करना
जरूरत से अधिक चिड़चिड़ापन
आंखों में पीलापन और छोटापन
देर से घर आना और कम बातचीत
भूख न लगना, सभी के साथ खाना न खाना
अधिकांश समय अकेले कमरे में बिताना
घर में महंगी चीजें और पैसों का यकायक गुम होना

ऐसे बरतें सतर्कता
अपने बच्चों के कमरों की तलाशी लें
कपड़े, मोजे और स्कूल-कालेज बैग खंगालते रहें
बच्चे की संगत पर नजर रखें… बातचीत करते रहें
अगर नशाखोरी है तो प्यार से छूटेगी
झाड़-फूंकनहीं डाक्टरी इलाज करवाएं
मनोचिकित्सक से सलाह लें
बच्चे को अकेले न छोड़ें, उसे समझने की कोशिश करें

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