
मंडी। स्वास्थ्य विभाग की ओर से एनीमिया की रोकथाम के लिए स्कूलों में बच्चों के लिए आयरन फोलिक एसिड की गोलियां देने की योजना शुरू की गई, लेकिन आयरन गोली खाने के बाद स्कूली बच्चों की तबीयत खराब होने का प्रदेश में दूसरा मामला सामने आया है। बिलासपुर जिले के एक स्कूल में आयरन की गोलियां खाने के बाद कई बच्चे अस्पताल पहुंचे हैं। ऐसा ही मामला धर्मपुर क्षेत्र के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला मढ़ी में भी बुधवार को सामने आया है। गोली खाने के बाद करीब 40 बच्चों को पेट दर्द व उल्टी आने से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में लाना पड़ा।
बच्चों में एनीमिया की रोकथाम के लिए प्रदेश सरकार ने सभी स्कूलों में बच्चों को आयरन की गोलियां देने की योजना चलाई है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से स्कूलों को दवाइयां उपलब्ध करवाई जाती हैं। सप्ताह में एक बार बच्चों को स्कूल में ही आयरन की गोलियां दी जाती हैं। आयरन गोलियों में कोई कमी है या जानकारी का अभाव। इस संशय से अभिभावक भी अपने बच्चों को गोलियां देने से कतराने लगे हैं।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की मानें तो आयरन की गोली को खाली पेट नहीं लेना पड़ता है, क्योंकि आयरन गोली खाने से गैसटिक व पेट में जलन होती है। इसके बावजूद भी विभाग की ओर से इस बारे में स्कूलों को कोई जानकारी नहीं दी गई।
मुख्य चिकित्साधिकारी डा. एबी गुप्ता का कहना है कि आयरन की गोली खाने से कोई बीमार नहीं होता है। उन्होंने कहा कि कई बार बच्चे खाली पेट ही स्कूल जाते हैं। खाली पेट आयरन की गोली खाने से गैसटिक व पेट में जलन होती है। उन्होंने बताया कि इस योजना को शुरू करने से पहले ट्रेनिंग भी दी गई। उन्होंने कहा कि सभी स्कूलों के शिक्षकों से भी आग्रह गया है कि बच्चों को खाली पेट आयरन की गोलियां न दें।
