
धर्मशाला। अगर आपको बिना किसी आवेदन ई-मेल पर जाब का आफर आए। आपकी महीने की तनख्वाह भी अच्छी-खासी तय कर दी गई हो। सिक्योरिटी फंड के नाम पर डिपॉजिट की बात कही गई हो तो जरा सावधान हो जाएं। जी हां, यह रोजगार का सुनहरा अवसर नहीं, बल्कि ई-मेल फ्राड का नया तरीका है।
साइबर क्राइम के जरिये लोगों को ठगने का सिलसिला फिर शुरू हो गया है। शातिरों ने अब ई-मेल से फ्राड का नया तरीका ढूंढा है। लाटरी के बाद हिमाचल में अब जॉब के नाम पर फर्जीवाड़ा शुरू हो गया है। ई-मेल पर युवाओं को लुभावने पैकेज भेजकर शातिर सिक्योरिटी फंड के नाम पर 10 से 15 हजार तक डिमांड कर रहे हैं। हालांकि, अभी तक पुलिस जांच में इस तरह के मामले सामने नहीं आए हैं, लेकिन युवा समय रहते अलर्ट न हुए तो फ्राड में फंस सकते हैं। हैरत की बात तो यह है कि कारपोरेट जगत में नामीगिरामी कंपनियों के नाम पर यह फर्जीवाड़ा शुरू किया गया है। एडिशनल एसपी मोहित चावला ने युवाओं से अपील की है कि वे इस तरह के फ्राड में न फंसें। अगर पुलिस के पास इस तरह की कोई शिकायत आती है तो मामले की आईटी एक्ट के तहत जांच की जाएगी।
केस स्टडी
धर्मशाला के सचिन वर्मा को इस तरह की ई-मेल मिली तो उन्हें लगा कि उन्हें सचमुच नामी आटो मोबाइल कंपनी के लिए सेलेक्ट किया गया है। ई-मेल में 78 अभ्यर्थियों से 65 का चयन किया गया है। यह भी कहा गया है कि आपका रिज्यूम जॉब साइट्स से सेलेक्ट किया गया है। शातिरों ने ई-मेल से दिल्ली में साक्षात्कार की तारीख और समय तय करते हुए 95 हजार से 3 लाख प्रति माह वेतन का हवाला दिया है। लिखा है कि ऑफर लेटर, फ्लाइट टिकट और होटल रिजर्वेशन लेटर 15 हजार 800 रुपए बतौर सिक्योरिटी फंड (रिफंडेबल) जमा करवाने पर संबंधित पते पर भेज दिए जाएंगे। सचिन ने बताया कि जब उन्होंने कंपनी के रजिस्टर्ड आफिस में संपर्क किया तो पता चला कि संबंधित कंपनी इस तरह से किसी को भी जॉब आफर नहीं देती।
कैसे बचें फ्राड से
साइबर एक्सपर्ट सौरव सोनी के मुताबिक सबसे पहले तो यूजर यह जांच लें कि उन्होंने इस तरह की जॉब के लिए कभी आवेदन किया था या नहीं। उसके बाद जरूरी है कि कंपनी के रजिस्टर्ड आफिस में पड़ताल के बाद ही आगे बढ़ें। खासकर जिस ई-मेल में सिक्योरिटी फंड के नाम पर रुपयों की डिमांड की गई हो तो ऐसी ई-मेल का जवाब देने से बचें। सिर्फ ई-मेल पर ही नहीं, आजकल फोन पर खुद को बैंक का एक्जीक्यूटिव बताकर भी लोग इंटरनेट बैंकिंग के पासवर्ड चुरा रहे हैं। इसलिए पूरी छानबीन के बाद अपनी बैंक संबंधी जानकारी किसी को दें। शक होने पर संबंधित बैंक से संपर्क करें।
