
शिलाई (सिरमौर)। क्षेत्र की विषम भौगोलिक परिस्थिति को देखते हुए 108 एंबुलेंस सेवा का लाभ दुर्गम ग्रामीण क्षेत्रों में रह रहे लोगों को त्वरित नहीं मिल पा रहा। क्षेत्र की 35 पंचायतों के लिए 108 एंबुलेंस सेवा दुर्गम सड़क मार्गों पर दौड़ाना कठिन चुनौती बनी है। दर्जनों गांव ऐसी दूरी तथा बीहड़ इलाकों में बसे हैं वहां समय पर 108 सेवा का पहुंचना नामुमकिन है।
शिलाई क्षेत्र की ही बात करें तो शिलाई से कोटा पाब 70 किमी, शिलाई से जौग 70 किमी, गत्ताधार 65 किमी, कफोटा 28 किमी, जाखना 40 किमी, बालीकोटी 8 किमी, मोहराड़ 20 किमी, वेला 12 किमी, नैनीधार 25 किमी, टिंबी, टटियाणा 35 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। ऐसे में लोगों द्वारा बुलाई जा रही आपातकालीन 108 सेवा इन उबड़ खाबड़ रास्तों से गुजर कर लगभग 4 से 5 घंटे में पहुंच रही है। इमरजेंसी सेवा हासिल करने वाले लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
इसका उदाहरण हाल ही में हुई एक हादसे में देखने को मिलता है। टिंबी में हुई जीप दुर्घटना के बाद 108 सेवा को बुलाया गया। यह सेवा हादसे के बाद एक घंटे देरी से पहुंची। बाद में मालूम हुआ कि उक्त 108 सेवा किसी अन्य मार्ग पर कार्यरत थी, जहां से जल्दी पहुंचना असंभव था।
क्षेत्र के लोगों ने मांग की है कि भौगोलिक समस्या से निपटने के लिए कफोटा, कमरऊ, क्यारी गुंडाह में एक-एक 108 एंबुलेंस उपलब्ध करवाई जाए।
उधर इस मामले में 108 के डीएम आकाश दीप ने बताया कि क्षेत्र के लिए दो अन्य 108 सेवाओं की जरूरत है। यह मांग प्रदेश सरकार को भेज दी गई है। यदि मांग स्वीकार की जाती है तो क्षेत्र के लिए दो 108 एंबुलेंस चलाई जाएगी।
