
नाहन (सिरमौर)। कुमारहट्टी-नाहन निर्माणाधीन सुपर हाइवे की धूल नाहन से लगती पॉश कालोनियों के लिए जी का जंजाल बनी है। यशवंत बिहार के कई लोग तो घर को छोड़कर अपने नाहन स्थित रिश्तेदारों के यहां रहने लगे हैं।
उधर, सड़क निर्माण की धूल से झमीरिया, बनोग, चबाहां, सेन की सेर, आईटीआई कालोनी के सैकड़ों लोग परेशान हैं। पच्छाद क्षेत्र के दो दर्जन गांव में पशुचारे को लेकर संकट छाया हुआ है जिस कारण पशुपालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सड़क निर्माण में करीब दो दर्जन गांव ऐसे हैं जिनके पशुओं का चारा सड़क के किनारों पर लगे घास व पेड़ हैं लेकिन ये सब पूरी तरह से धूल में दबे हुए हैं। अब पशुचारे को पशुपालक काट भी नहीं रहे हैं और न ही उस चारे को अब पशु खा रहे हैं।
पशुपालक अनिल शर्मा, रोशन सिंह, दलीप कुमार, सत्या देवी, नीरा शर्मा, सोमा देवी, कंचन देवी व मीरा देवी ने बताया कि महिलाओं को पशुचारे के लिए जंगल के दूर-दूर हिस्से में भटकना पड़ रहा है। पशुपालकों ने कहा कि लोगों को अधिकतर खर्चा करके पशुचारा मंगवाना पड़ रहा है।
बनाहां धिन्नी पंचायत प्रधान अनूप शर्मा ने बताया कि उन्होंने अपनी पंचायतों के जिन पशुपालकों की जमीन सुपर हाइवे सड़क निर्माण के तहत आई है और उन का पशु चारा खराब हो गया है उन्होंने उन लोगों को लेकर सुपर हाइवे सड़क निर्माण कर रही कंपनी के डायरेक्टर श्रीकृष्णा से बात की है। साथ ही मांग की है कि जिन पशु पालकों का पशुचारा खराब हुआ है उसका मुआवजा दिया जाए।
उधर, सोमदत्त बिल्डर्स कंपनी के डायरेक्टर श्रीकृष्णा ने बताया कि उनके पास लोगों की इस तरह की शिकायत आई है। निर्माण में जुटे ठेकेदारों को हिदायत दी गई है कि निर्माणाधीन सड़कों पर पानी का छिड़काव करें और सड़क को तुरंत पक्का करें।
