
बनबसा। शारदा बैराज ने 85 साल की उम्र पूरी कर ली है। अंग्रेजों द्वारा निर्मित इस बैराज को तत्कालीन यूपी संयुक्त प्रांत के गवर्नर सर मैलकम हेली ने 11 दिसंबर 1928 को राष्ट्र को समर्पित किया था। इसी बैराज द्वारा तैयार रिजर्व वायर के जरिए यूपी के रायबरेली तक बाईस लाख एकड़ से अधिक भूमि की सिंचाई होती है। साथ ही, यह बैराज भारत-नेपाल के बीच आवागमन सेतु का कार्य भी कर रहा है। पर यह विडंबना ही है कि उत्तराखंड राज्य बनने के बाद भी अभी तक इस बैराज पर उत्तर प्रदेश का अधिकार है।
नहर निकालने को उपयुक्त फुटहिल (जहां से पहाड़ शुरू होते हैं) बनबसा में 85 वर्ष पूर्व अंग्रेजों ने शारदा नदी पर बैराज का निर्माण कराया था। बनबसा से निकली शारदा नहर पांच सौ किमी. दूर रायबरेली तक करीब 22लाख आठ हजार एकड़ कृषि भूमि की सिंचाई करती है। वर्ष 1856-57 में मद्रास इंजीनियर कोर के लेफ्टीनेंट एंडरसन ने इस फुटहिल का नहर निकालने के लिए सर्वेक्षण किया था। वर्ष 1857 के विद्रोह में उनके सभी अभिलेख नष्ट हो गए थे। उनकी बची एकमात्र डायरी के आधार पर सन् 1867 में कैप्टन फारबेस ने सर्वे कार्य आगे बढ़ाया। प्रथम विश्व युद्ध के बाद सर बरनार्ड डायरले ने बैराज की डिजाइनिंग की। वर्ष 1918 में बैराज का निर्माण शुरू किया गया, जो 1928 में पूरा हुआ। दस वर्ष की मेहनत के बाद बनकर तैयार हुए शारदा बैराज के निर्माण में करीब साढ़े नौ करोड़ रुपए की लागत आई थी। बैराज निर्माण में करीब 25 हजार मजदूरों का
