
शिमला। प्रदेश में 85वें संशोधन के मामले में दोबारा से रिपोर्ट तैयार की जानी है। प्रदेश में इस संशोधन को लागू न करने के फैसले के बाद सरकार ने सभी पक्षों की सुनवाई के लिए कार्यकारी मुख्य सचिव की अध्यक्षता में कमेटी का गठन किया है। कमेटी के समक्ष शुक्रवार को तीनों कर्मचारी संगठनों ने अपने पक्ष रखे हैं। इसमें सभी पक्षों ने अपनी ओर से तैयार आंकड़ों का खाका कमेटी के सदस्यों को सौंपा है। कमेटी ने फैसला लिया है कि इन सभी आंकड़ों को खंगालने और राज्य सरकार के आंकड़ों के साथ मिलाने के बाद एक रिपोर्ट तैयार की जानी है। इस रिपोर्ट को बाद में प्रदेश मंत्रिमंडल की बैठक में रखा जाना प्रस्तावित है।
सर्वोच्च न्यायालय की ओर से दिए गए समय में राज्य मंत्रिमंडल ने इस मसले पर लंबी चरचा के बाद इसे लागू न करने का फैसला लिया था। इसका एससी/एसटी कर्मचारियों ने विरोध किया था। इनकी मांग पर मुख्यमंत्री ने पक्ष रखने का मौका दिया और सभी का पक्ष सुनने के लिए कमेटी का गठन किया था। इस कमेटी की अभी तक हुई बैठकों में एससी/एसटी कर्मचारियों ने आंकड़े पेश किए। इनके साथ ही सामान्य कर्मचारियों की ओर से भी कर्मचारी प्रतिनिधियों ने आंकड़े पेश किए हैं। इन आंकड़ों का अध्ययन कर कमेटी के सदस्य कार्मिक विभाग के पिछले आंकड़ों के साथ मिलान करेगी। इसके बाद ही रिपोर्ट तैयार की जानी प्रस्तावित है। इस विवाद के चलते हिमाचल में लंबे समय तक सरकारी विभागों, निगमों और बोर्डों में सर्वोच्च न्यायालय के आदेशानुसार पदोन्नतियों पर प्रतिबंध रहा।
कर्मचारी संगठनों के पक्षों को सुनने के लिए गठित कमेटी के सदस्य सचिव और प्रधान सचिव कार्मिक एसकेबीएस नेगी ने माना कि सभी संगठनों ने अपने पक्ष रखे हैं। इसमें सौंपे गए आंकड़ों को सरकारी आंकड़ों के साथ मिलान करने के बाद रिपोर्ट तैयार की जानी है।
