
चंडीगढ़
राज्यों के मुख्य सचिवों के पास सरकार ने भेजे प्रस्ताव, उत्तराखंड ने मांगा विवरण
सूबे में 27 लाख हेक्टेयर में बोई गई है धान की फसल, 16.50 मिलियन टन बनेगी पराली
यह पहली बार होगा कि पंजाब सरकार सूबे के लिए सिरदर्द बनी पराली को पड़ोसी राज्यों को बेचेगी। पराली बेचने के लिए सरकार की ओर से पड़ोसी राज्य हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और दिल्ली के मुख्य सचिवों को एक प्रस्ताव भेजा गया है। अच्छी बात यह है कि पहाड़ी राज्य उत्तराखंड ने पराली खरीदने को लेकर विवरण मांगा है।
इस बार पंजाब में 27 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में धान की फसल रोपी गई है, जो अब पक चुकी है और काटी जा रही है। इस बार सूबे में पैदा होने वाले धान की फसल से 16.50 मिलियन टन पराली बनने की संभावना है। पराली की इतनी बड़ी मात्रा को लेकर पंजाब सरकार ने व्यापक कार्ययोजना तैयार की है।
इसी योजना के तहत यह तय किया गया है कि इस बार सरकार पराली को पड़ोसी राज्यों में बेचेगी। मुख्यमंत्री के निर्देश पर पराली बेचने को लेकर एक प्रस्ताव सभी पड़ोसी राज्यों के मुख्य सचिवों को भेजा गया है। उत्तराखंड की ओर से पराली खरीदने को लेकर विवरण सरकार से मांगा गया है। राज्य सरकार द्वारा महामारी के दौर में धान की पराली जलाने की समस्या की रोकथाम के लिए कानूनी और प्रशासनिक कदम उठाए जाने के अलावा लोगों में जागरूकता मुहिम भी चलाई जा रही है।
3,500 कृषि मशीनें दी जाएंगी
पराली से निपटने के लिए इस साल किसानों को 23,500 और कृषि मशीनें सरकार की ओर से दी जा रही हैं। यह मशीनें किसानों को व्यक्तिगत, समूहों या सहकारी सभाओं के द्वारा 50 से 80 प्रतिशत सब्सिडी पर दी जा रही हैं। इसके अलावा पिछले दो सालों में पराली को खेत में ही निपटाने के लिए 51,000 मशीनें दीं गईं।
पराली का होगा भंडारण
पराली न जलाई जाए इसको लेकर सरकार की ओर से भंडारण की भी व्यवस्था की गई है। साझे स्थानों, कैटल पौंड और गौशालाओं में पराली एकत्र करने के लिए जिलों में स्थानों की पहचान की जा चुकी है, जहां किसान या कोई भी उद्यमी अपनी पराली का भंडारण कर सकता है। यह बासमती की पराली के भंडार को उन स्थानों पर ले जाया जा सकता है, जहां इसको पशुओं के चारे के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है।
मुख्यमंत्री के निर्देश पर पराली जलाने की समस्या से निपटने के लिए व्यापक कार्य योजना बनाई गई है। इसके लिए सूबे के सभी जिलों में 800 नोडल अफसरों की भी तैनाती की गई है। अनिरुद्ध तिवारी, अतिरिक्त मुख्य सचिव (विकास)
सुपर एसएमएस के बिना चलने वाली कंबाइन मशीनें होंगी जब्त
पंजाब में पराली जलाने की समस्या से निपटने के लिए पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने सुपर स्ट्रा मैनेजमेंट सिस्टम (एसएमएस) के बिना चलने वाली कंबाइन मशीनों को जब्त करने के निर्देश दिए हैं। अतिरिक्त मुख्य सचिव (विकास) अनिरूद्ध तिवारी ने यह जानकारी देते हुए बताया कि एक कंबाइन पर सुपर एसएमएस लगवाने के लिए राज्य सरकार कुल कीमत पर 50 प्रतिशत सब्सिडी दे रही है।
उन्होंने आगे बताया कि कृषि विभाग ने सब्सिडी पर सुपर एसएमएस लगवाने के लिए आवेदन देने की आखिरी तारीख भी बढ़ाकर 30 सितंबर तक कर दी है। पंजाब में में लगभग 12,500 कंबाइन मशीन हैं, जिनमें पांच हजार कंबाइन मशीनों पर ही एसएमएस लग चुके हैं। एसएमएस लगाने के लिए 2000 आवेदनों को मंजूरी दे दी गई है।
यह होगी कार्रवाई
पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा सुपर एसएमएस के बिना चलने वाली कंबाइनों के मालिकों पर वातावरण मुआवजा लागू किया जाएगा। इसके अंतर्गत पहली, दूसरी और तीसरी बार उल्लंघन करने वाले कंबाइन मालिक को क्रमवार 50000 रुपये, 75000 और एक लाख रुपये वातावरण मुआवाजा अदा करना होगा। तीसरी बार उल्लंघन के बाद एक लाख रुपये का मुआवजा भरना होगा।
