
नई दिल्ली: भारत के 67वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने राष्ट्र के नाम संदेश में बुधवार को कहा कि पिछले लगभग सात दशकों से हम अपने भाग्य के नियंता खुद हैं। और यही वह क्षण है, जब हमें पूछना चाहिए कि क्या हम सही दिशा में आगे बढ़ रहे हैं?
मुखर्जी ने कहा कि आज के दिन हमारा ध्यान हमारे स्वतंत्रता संग्राम को सही दिशा प्रदान करने वाले राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और देश की स्वतंत्रता के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले शहीदों सहित उन महान देशभक्तों की ओर जाता है, जिनके अदम्य संघर्ष ने हमारी मातृभूमि को लगभग 200 वर्षों के औपनिवेशिक शासन से मुक्ति दिलवाई।
उन्होंने कहा कि गांधीजी, न केवल विदेशी शासन से, बल्कि हमारे समाज को लम्बे समय से जकड़ कर रखने वाली सामाजिक बेडिय़ों से भी मुक्ति चाहते थे। उन्होंने हर भारतीय को खुद पर विश्वास करने की तथा बेहतर भविष्य के लिए उम्मीदों की राह दिखाई। गांधीजी ने स्वराज, अर्थात सहिष्णुता तथा आत्म-संयम पर आधारित स्व-शासन का वादा किया। उन्होंने अभावों तथा दरिद्रता से मुक्ति का भरोसा दिलाया।
मुखर्जी ने कहा कि यदि हम उन मूल्यों को भुला देंगे जो गांधीजी के आंदोलन की बुनियाद थे, अर्थात, प्रयासों में सच्चाई, उद्देश्य में ईमानदारी तथा सबके हित के लिए बलिदान, तो उनके सपनों को साकार करना संभव नहीं होगा।
सीमा पर हमारे धैर्य की भी सीमा है
राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने बुधवार को कहा कि पड़ोसी देशों के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध बनाने के भारत के निरंतर प्रयासों के बावजूद सीमा पर तनाव रहा है और नियंत्रण रेखा पर संघर्ष विराम का बार-बार उल्लंघन हुआ है, जिससे जनहानि हुई है। शांति के प्रति हमारी प्रतिबद्धता अडिग है, परंतु हमारे धैर्य की भी एक सीमा है।
भारत के 67वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने राष्ट्र के नाम संदेश में कहा कि पिछले दिनों आंतरिक और बाह्य सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौतियां हमारे सामने आई हैं। छत्तीसगढ़ में माओवादी हिंसा के बर्बर चेहरे ने बहुत से निर्दोष लोगों की जानें लीं। आंतरिक सुरक्षा सुनिश्चित करने और राष्ट्र की क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
