
राजपुर (सिरमौर)। प्रदेश सरकार ने सभी पंचायतों को आनलाइन करने ने लिए 11 करोड़ कर राशि खर्च कर हर पंचायत को कंप्यूटरीकृत किया है। इसी के तहत सभी पंचायतों में प्रिया सॉफ्टवेयर डाल कर कंप्यूटर भी दिए गए हैं, लेकिन पांवटा विकास खंड की महज छह पंचायत में ही कंप्यूटर चालू हालत में हैं। जबकि एक में कंप्यूटर ही नहीं है। हाल यह है कि 64 में से 57 पंचायतों में कंप्यूटर धूल फांक रहे हैं।
सरकार ने पंचायतों से सीधे जड़े रहने के लिए यह योजना शुरू की थी। इसके लिए पंचायत सचिव और सहायकों को लैपटॉप दिए गए। साथ ही ई-पंचायत आठ एप्लीकेशन का प्रशिक्षण देकर पंचायतों को आनलाइन करने का दावा किया गया। लेकिन योजना सिरे नहीं चढ़ी। पांवटा विकास खंड में मात्र छह पंचायतें ब्राडबैंड सुविधा से जुड़ी हैं। बडवास पंचायत में अभी भी कंप्यूटर नहीं है। न ही डाटा आपरेटर है। इसके अलावा 57 पंचायतों में ब्राडबैंड या अन्य इंटरनेट की व्यवस्था नहीं होने से कंप्यूटर धूल फांक रहे हैं। स्थिति यह है कि जो पंचायतें आनलाइन जोड़ी थीं, उनमें कहीं पर उत्तराखंड राज्य की रोमिंग तो कहीं पर सिग्नल ही नहीं हैं। ऐसे में मोबाइल इंटरनेट के जरिए भी बात नहीं बनी।
ऐसे में पंचायतों में मनरेगा, इंदिरा गांधी आवास योजना, वाटर शेड, पंचायतों की दिहाड़ी, मानदेय सहित कई योजनाओं की एमआईएस रिपोर्ट आनलाइन तैयार नहीं हो रही है। इसके अतिरिक्त पंचायतों में चलाई जा रही विभिन्न विकास योजनाओं की रिपोर्ट बीडीओ, जिला ग्रामीण विकास अभिकरण, राज्य और केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय को नहीं भेजी जा रही है। उधर, पंावटा खंड अधिकारी ललित विक्रम सिंह दुल्टा ने पुष्टि करते हुए कहा कि कुछ पंचायतें उत्तराखंड सीमा से सटी हैं और ज्यादातर पंचायतें दुर्गम क्षेत्र में पड़ती हैं। वहां पर इंटरनेट कनेक्शन, ब्राडबैंड आदि का सिग्नल जैसी सुविधाएं न होने के कारण ये समस्याएं सामने आ रही है
