
सलूणी (चंबा)। शिक्षा खंड सलूणी के अंतर्गत चार प्राइमरी स्कूलों में एक भी अध्यापक नहीं है। इसके कारण इन स्कूलों में पढ़ रहे सैकड़ों छात्र-छात्राओं का भविष्य अधर में है। हालात यह है कि यहां पर दूसरे स्कूलों से डेपुटेशन पर शिक्षकों से काम चलाया जा रहा है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि उधार के इन शिक्षकों से कैसे बच्चों का उद्धार हो पाएगा। प्राथमिक पाठशाला सिंगा, दिगोड़ी, सरोगा और थनेला में करीब छह महीने से एक भी स्थायी अध्यापक तैनात नहीं है। यह स्कूल पिछले लगभग छह माह से बिना अध्यापकों के चल रहे है। अध्यापक न होने के कारण प्राइमरी स्कूल सिंगा में कुंदी स्कूल से डेपुटेशन पर अध्यापक भेजकर काम चलाया जा रहा है। इसके अलावा दिगोड़ी में भांदल स्कूल से, सरोगा में किहार से और थनेला स्कूल में आयल से डेपुटेशन पर अध्यापक को भेजा जा रहा है। जिन स्कूल से अध्यापकों को डेपुटेशन पर भेजा जा रहा है उन स्कूल में भी अध्यापकों की कमी हो रही है। स्थानीय निवासी भगत राम, चैन सिंह, प्रभिया, विनोद कुमार, कुलदीप सिंह, केवल कुमार, प्रेम लाल, चतर सिंह, नरेणू राम, परस राम, मोहन लाल और देशराज ने बताया कि आधा सत्र बीतने के बाद भी अध्यापकों की तैनाती नहीं हो पाई है। इस कारण बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। उन्होंने प्रदेश सरकार और शिक्षा विभाग से मांग उठाई कि स्कूलों में स्थायी अध्यापक की तैनाती की जाए। उधर, बीपीओ सलूणी रसालू राम ने बताया कि इन स्कूलों में रिक्त पड़े पदों के बारे में विभाग के उच्चाधिकारियों को अवगत किया गया है। सरकार की ओर से जैसे ही अध्यापकों की नियुक्ति की जाएगी। इन स्कूलों में अध्यापकों को भेज दिया जाएगा।
