
पांवटा साहिब (सिरमौर)। सिरमौर जिला के दूरदराज क्षेत्रों में आज भी प्रारंभिक शिक्षा की नींव में आंगनबाड़ी केंद्र अहम भूमिका निभा रहे हैं। हजारों नौनिहाल इन केंद्रों में पहुंचते हैं लेकिन 70 फीसदी आंगनबाड़ी केंद्रों को अपने भवन नहीं हैं। पांवटा बाल विकास परियोजना क्षेत्र में 430 में से 377 आंगनबाड़ी केंद्रों के पास अपनी छत मुहैया नहीं हो सकी है। केवल 65 के पास अपने आंगनबाड़ी केंद्र भवन हैं। करीब 30 केंद्रों के भवन को जमीन चिन्हित कर, स्वीकृति को फाइलें भेजी हैं।
बाल विकास परियोजना पांवटा क्षेत्र के तहत 430 आंगनबाड़ी केंद्र हैं। इन केंद्रों में 10 से 12 हजार नौनिहाल प्रारंभिक शिक्षा ग्रहण करते हैं। करीब 260 केंद्र किराए के भवनों में संचालित हो रहे हैं। विभिन्न स्कूल परिसरों, महिला मंडल-नवयुवक मंडल भवन, जंजघर एवं पंचायत घरों में चल रहे केंद्रों की संख्या 105 हैं। इनमें राहत की बात यह है कि ये केंद्र संचालन स्थलों का कोई किराया नहीं लिया जा रहा है। क्षेत्र के बेलधार एवं लोहाग बास केंद्रों में मिनी कार्यकर्ता कार्यरत हैं।
उधर, बाल विकास परियोजना अधिकारी पांवटा मदन चौहान ने पुष्टि की है। सीडीपीओ ने कहा कि कुल 430 में से 377 केंद्रों के पास फिलहाल अपने भवन नहीं है। अब तक 65 आंगनबाड़ी केंद्रों के अपने भवन हैं। 8 केंद्रों के भवन निर्माणाधीन, करीब 30 केंद्रों के भवनों को जमीन चिन्हित हो गई है। इनकी फाइलें स्वीकृति को प्रदेश सरकार एवं विभाग को भेज दी हैं।
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सीडीपीओ कार्यालय में 9 पद रिक्त, दिक्कतें
पांवटा साहिब (सिरमौर)। बाल विकास परियोजना में पांवटा क्षेत्र में 430 आंगनबाड़ी केंद्र पड़ते हैं। पांवटा सीडीपीओ कार्यालय में रिक्त पदों के चलते काफी दिक्कतें हो रही हैं। रिक्त पदों में 2 एसीडीपीईओ, 3 सुपर वाईजर एवं लिपिक के 4 पद शामिल हैं। लंबे समय ये पद रिक्त चल रहे हैं। सीडीपीओ कार्यालय में इन दिनों खूब लोगों का तांता लग रहा है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं एवं सहायिकाओं के रिक्त पद भरे जाने हैं। इसके लिए साक्षात्कार की औपचारिकताएं चल रही हैं लेकिन कार्यालय में रिक्त पड़े पदों से स्टाफ को काफी मशक्कत करनी पड़ रही है।
