
चंबा। जम्मू-कश्मीर से मणिमहेश के लिए जा रही वैष्णो छड़ी यात्रा का जत्था चंबा पहुंच गया है। 29 अगस्त को जम्मू-कश्मीर के खलानी नामक स्थान से निकले इस जत्थे ने शनिवार को चंबा चौगान में डेरा जमाया। इस जत्थे में जम्मू-कश्मीर के चार जिलों के लोग शामिल हैं। इसमें जिला डोडा, ठाठरी, भदरवाह व किश्तवाड़ शामिल हैं। छड़ी के गुरु (बलोड़ा) विश्वनाथ (76) ने बताया कि वह 31वीं बार मणिमहेश यात्रा पर जा रहे हैं। पहली बारवह 1983 में मणिमहेश यात्रा पर गए थे। उन्होंने बताया कि पहले वह मणिमहेश यात्रा के दौरान भेड़ों की बलि देते थे, लेकिन वर्ष 1996 में भोलेनाथ उनके सपने में आए और उन्होंने जीव हत्या करने से उन्हें रोका। उसके बाद उन्होंने 13वें साल वैष्णो छड़ी यात्रा निकाली। जब वह वैष्णो छड़ी लेकर मणिमहेश गए तो भोलेनाथ ने उन्हे गद्दी के भेष में साक्षात दर्शन दिए थे। उन्होंने कहा कि रात को 11 बजे से लेकर दो बजे तक उन्होंने साक्षात भोलेनाथ व शेषनाग को देखा। इसके बाद वह इस बार 19वीं बार वैष्णो छड़ी लेकर मणिमहेश यात्रा पर निकले हैं। उन्होंने कहा कि उनका जत्था एकमात्र ऐसा जत्था है, जो वैष्णव है और मणिमहेश यात्रा के दौरान जीवों की बलि नहीं देेता। उन्होंने बताया कि जब से उन्होंने वैष्णव छड़ी यात्रा निकालनी शुरू की है, तब से उनके जत्थे पर किसी प्रकार का कोई संकट नही आया। पहले यात्रा के दौरान कोई श्रद्धालु बीमार पड़ जाता था तो किसी को कई प्रकार की समस्याओं से जूझना पड़ता था, लेकिन 19 साल से उनके जत्थे को किसी प्रकार की दिक्कत का सामना नहीं करना पड़ा। उन्होंने बताया कि उनका जत्था एक सितंबर को चंबा से निकलेगा व राख में रुकेगा। इसके बाद दो को दुर्गेठी, तीन को लाहल, चार को भरमौर, पांच को भरमौर में भंडारा देने के बाद छह को हड़सर, आठ को धनछो व नौ सितंबर को मणिमहेश पहुंचेंगे। इस अवसर वेद प्रकाश, राकेश, ओम राज, नेक चंद, अमरीका देवी, क ौशल्या देवी, दर्शन कु मार, मोहन लाल, संगीता देवी और अमित कुमार मौजूद रहे।
