27 लाख बच्चों पर केवल एक सर्जन

शिमला। हिमाचल में 18 वर्ष तक के 27 लाख से ज्यादा बच्चों पर आईजीएमसी में सिर्फ एक ही पीडियाट्रिक्स सर्जन हैं। इससे सभी बच्चों की सर्जरी राज्य के भीतर नहीं हो पा रही है। मजबूरन मरीज पीजीआई रेफर करने पड़ रहे हैं। प्रदेश के सबसे बड़े मेडिकल कॉलेज में विशेषज्ञों की ही कमी नहीं है बल्कि जटिल सर्जरी के उपकरणों का भी टोटा है। प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं के दावों की धरातल पर हकीकत इससे स्पष्ट हो रही है।
हिमाचल में एक साल तक के बच्चों के मुफ्त इलाज के दावे भी हो रहे हैं। जननी-शिशु सुरक्षा कार्यक्रम चल रहे हैं। 108 एंबुलेंस मुफ्त सेवाएं दे रही हैं। जच्चा-बच्चा को घर छोड़ने को नई एंबुलेंस मंगवाई जा रही हैं। स्कूल हेल्थ कार्यक्रम मेें सभी बच्चों के मुफ्त इलाज हो रहे हैं। पर बच्चों के जटिल रोगों की सर्जरी को यहां केवल एक ही पीडियाट्रिक्स सर्जन हैं।
दो साल बाद इकलौते सर्जन हो जाएंगे सेवानिवृत्त
आईजीएमसी में पीडियाट्रिक्स सर्जन प्रोफेसर सुरेश गुप्ता हैं और यही विभागाध्यक्ष भी हैं। गुप्ता लगभग दो साल बाद सेवानिवृत्त हो जाएंगे। एक चिकित्सक पहले यहां नियुक्ति के बाद काम छोड़कर चले गए हैं। मंजूर पदों में से यहां एक सह आचार्य, एक सहायक आचार्य, दो हाउस सर्जन और चार रजिस्ट्रार के पद हैं जो सभी खाली चल रहे हैं। कुछ दिन पहले दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल शिमला से एक शिशु को फूड पाइप बंद होने पर आईजीएमसी रेफ र किया गया। यहां से उसे सुविधाओं की कमी के चलते पीजीआई चंडीगढ़ रेफर किया गया।
‘क्या वस्तुस्थिति है? इसका आईजीएमसी शिमला से पता किया जा सकता है। मैं मामले को जाने बिना कुछ नहीं कह पाऊंगा।’-नंद लाल, मुख्य संसदीय सचिव (स्वास्थ्य)

‘यहां सुपर स्पेशिलिटी विभागों में स्टाफ की दिक्कत है। ये अभी शुरुआती दौर में हैं। विशेषज्ञ डाक्टर नहीं मिल पा रहे हैं। पीडियाट्रिक्स सर्जरी विभाग भी इस कारण प्रभावित हो रही है।’

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