24 घंटे पानी देने का दावा हवा

शिमला। राजधानी में 24 घंटे पीने का पानी देने का दावा लगता है सपना बन कर ही रह गया है। एक माह बाद भी प्रदेश सरकार ने निगम की ओर से भेजी गई फाइल पर कोई जवाब नहीं दिया है। 29 जून को निगम प्रशासन ने प्रोजेक्ट देने के लिए शॉर्ट लिस्ट की गई कंपनी की डिटेल सरकार को भेजी थी। इसके तहत सरकार से प्रोजेक्ट को सुचारु रूप से चलाने के लिए आर्थिक सहयोग करने की गुहार लगाई थी लेकिन शहर की पेयजल और सीवरेज व्यवस्था को ठेके पर देने के मामले की कैबिनेट में चर्चा नहीं हुई। 132 साल पुरानी शिमला की पानी और सीवरेज व्यवस्था को ठेके पर लेने के लिए 20 मई को दो कंपनियों ने टेंडर जमा करवाए थे। दोनों कंपनियों के दस्तावेजों का अध्ययन करने के बाद टेक्निकल बिड के माध्यम से निगम ने एक कंपनी को शॉर्ट लिस्ट किया। लेकिन, कंपनी की ओर से भरे गए रेट से शहर में पानी को महंगा करने की निगम को जरूरत महसूस हुई। इसके चलते निगम ने आर्थिक सहयोग की मांग करते हुए मामला सरकार को भेज दिया ताकि उपभोक्ताओं पर कोई बोझ नहीं पड़े। निगम आयुक्त अमरजीत सिंह ने बताया कि ऐसल ग्रुप को टेक्निकल बिड के बाद शॉर्ट लिस्ट किया गया है। मामला राज्य सरकार के ध्यानार्थ है। सरकार के आदेशानुसार आगामी कार्रवाई की जाएगी।

23 साल आउटसोर्सिंग की योजना
केंद्र सरकार की जवाहर लाल नेहरू शहरी नवीनीकरण योजना के तहत बनाई गई यह योजना करीब 127.10 करोड़ रुपये की है। इसमें केंद्र सरकार का 80 प्रतिशत हिस्सा है जो 96.68 करोड़ का है। इसके अलावा राज्य सरकार और नगर निगम शिमला ने 17.71 करोड़ और 12.71 करोड़ की राशि देनी है। 54 करोड़ रुपये सीवरेज और 72 करोड़ पेयजल व्यवस्था पर खर्च किए जाने प्रस्तावित हैं। लेकिन, शहर की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए 127 करोड़ में यह प्रोजेक्ट पूरा नहीं हो रहा है। इस प्रोजेक्ट में कुल खर्चा करीब 250 करोड़ का है। ऐसे में नगर निगम शिमला ने इस प्रोजेक्ट को 23 वर्षों के लिए आउटसोर्स करने की योजना बनाई है। इसके तहत निजी कंपनी 122.86 करोड़ खर्च करेगी।

प्रोजेक्ट में दिखाए गए सपने
– 24 घंटे शहर में पानी की सप्लाई दी जाएगी।
– पाइपों की लीकेज को दूर किया जाएगा।
– सभी वार्डों में सीवरेज की नई लाइनें बिछाई जाएंगी।
– सीवरेज पंपिंग स्टेशन और सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट को सुधारा जाएगा।

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