24 गत्ता उद्योग बंद होने के कगार पर

24 गत्ता उद्योग बंद होने के कगार पर
बद्दी (सोलन)। प्रदेश के गत्ता उद्योग लगातार बढ़ रहे खर्चों के बोझ में दबता जा रहा है। इस वर्ष खर्चों में 20 फीसदी की बढ़ोतरी हो गई है। बावजूद इसके गत्ते के रेट नहीं बढ़ पाए हैं। जिससे यह कार्य अब घाटे का सौदा साबित हो रहा है। ऐसे में संघ का मानना है कि अगर प्रदेश सरकार ने गत्ता उद्योग को उभारने के लिए कोई प्रयास नहीं किया तो आने वाले समय में गत्ता उद्योग चलाने काफी कठिन हो जाएगा। बीबीएन में 150 में से दो दर्जन उद्योग बंद होने के कगार पर हैं।
बीबीएन में डेढ़ सौ इकाइयों में 5 हजार कामगार कार्यरत हैं। यहां पर माह 25 हजार टन कागज से गत्ता तैयार होता है। सरकार को गत्ता उद्योग से टैक्स के रूप में चार करोड़ प्रति माह की आय है। मात्र एक वर्ष के दौरान गत्ते के 20 फीसदी खर्चे तो बढ़ गए हैं लेकिन गत्ते के रेट वही है जिससे अब ज्यादा दिन तक घाटे में काम नहीं हो पाएगा। एक वर्ष के दौरान क्राफ्ट व बीएफ पेपर के रेट एक से दो रुपये तक बढ़ गए हैं। 18 से 28 बीएफ पेपर के रेट चार रुपये बढ़े हैं। कामगार चार हजार की बजाए 48 सौ रुपये दिहाड़ी ले रहे हैं। कारीगर छह हजार की बजाए 85 सौ रुपये तक पहुंच गए हैं। डीजल के रेट बढ़ने से भाडा में 15 फीसदी बढ़ोतरी हुई है। गम में चार से साढ़े पांच रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी हुई है। यही नहीं सिटिचिंग वायर दस रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी हो गई है। स्याही में 15 फीसदी, बिजली की दर में 75 पैसे प्रति यूनिट, बैंक ब्याज में 11 से 15 फीसदी बढ़ोतरी हुई है। गत्ता उद्योग पिछले छह माह से गत्ते के रेट बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं। वहीं रेट बढ़ने की बजाए उल्टा पहले की बजाए अब पचास दिन देरी से पेमेंट का भुगतान हो रहा है।

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