
नई दिल्ली: लाल किले का ऐतिहासिक प्राचीर, ऊपर बादलों की छांव, हल्की-हल्की हवा और उसमें मौजूद नमी देश के स्वतंत्रता दिवस के जश्न के मौके पर कुदरत इससे बेहतर तोहफा नहीं दे सकती थी। जब प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने लाल किले पर राष्ट्रध्वज फहराया तो क्या बच्चे, क्या बूढे, क्या सेना के जवान क्या आम इंसान, सबने वायुसेना के बैंड के साथ जन-गण-मन गुनगुनाना शुरू कर दिया।
लोगों ने खड़े होकर राष्ट्रध्वज के प्रति सम्मान दिखाया। सेना के जवानों ने तिरंगे को सलामी दी और 21 तोपों ने गरज-गरज कर उद्घोष किया कि हम आजाद हैं अपनी सरजमीं पर जीने के लिए हम सक्षम हैं दुश्मनों से देश की रक्षा करने के लिए और हम तैयार हैं अपने देश को दुनिया में अग्रणी स्थान दिलाने के लिए।
