
शिमला। राजधानी में चल रही एचआरटीसी टैक्सियां नियमों-कानूनों की धज्जियां उड़ा रही है। वरिष्ठ नागरिकों, अक्षम व्यक्तियों और छोटे बच्चों को सुविधा प्रदान करने के लिए शुरू की गई एचआरटीसी टैक्सी सेवा ऑपरेटरों के लिए मोटी कमाई का जरिया बन गई हैं। 1900 से अधिक बसों का काफिला हांकने वाले एचआरटीसी मैनेजमेंट की 20 टैक्सियों के संचालन में हवा निकल गई है।
न्यायालय और प्रदेश सरकार के सख्त निर्देशों के बाद भी राजधानी में एचआरटीसी टैक्सियों के संचालन का फायदा पात्र लोगों को नहीं मिल पा रहा। शहर में एचआरटीसी टैक्सियों का प्रयोग या तो पर्यटक कर रहे हैं या फिर महिलाएं अपने बच्चों को स्कूल से लाने ले जाने के लिए टैक्सियों का इस्तेमाल कर रही हैं। कुछ प्रभावशाली लोगों द्वारा तो इन टैक्सियों का प्रयोग भारवाहक वाहनों के तौर पर भारी भरकम सामान लाने ले जाने के लिए भी किया जा रहा है। स्टॉपेज पर यात्रियों को टैक्सियों में बैठाने के लिए उपयुक्त व्यवस्था न होने के कारण रोजाना मारधाड़ मच रही है। इतना ही नहीं, बिना टिकट, वर्दी और दस्तावेजों के टैक्सियों का संचालन किया जा रहा है।
