
धारचूला (पिथौरागढ़)। 17 जून की आपदा के बाद से आपदा प्रभावित धारचूला क्षेत्र में रसोई गैस की आपूर्ति नहीं हुई है। लोग पहले की तरह लकड़ियों पर खाना बनाने पर मजबूर हो गए हैं। ऐसा तब हुआ है जब केएमवीएन के प्रबंध निदेशक दीपक रावत के हाथों में ही आपदा प्रबंधन का जिम्मा है।
19 दिन बाद भी सरकारी अमला धारचूला तक यातायात बहाल नहीं कर पाया है। डीएम डा. नीरज खैरवाल ने 28 जून तक धारचूला तक यातायात संचालन का दावा किया था, लेकिन हालात डीएम के दावों की हवा निकाल रहे हैं। अब भी धारचूला से 14 किमी पहले नया बस्ती तक ही बीआरओ सड़क ठीक कर पाया है। 19 दिन बीतने के बाद भी धारचूला में रसोई गैस के सिलेंडरों की सप्लाई नहीं हुई है। बाजार से सब्जियां गायब है। मूली आदि के पत्तों से लोग काम चला रहे हैं।
रसोई गैस सप्लाई का जिम्मा केएमवीएन के पास है। निगम के एमडी दीपक रावत को धारचूला में आपदा प्रबंधन का जिम्मा सौंप रखा है। हेलीकॉप्टर संचालन भी इन्हीं साहब के हाथों में है। एमडी ने छोटी गाड़ियों से गैस सिलेंडर लाने का वायदा किया था, यह वायदा भी डीएम के सड़क खोलने के वायदे की तरह हवा हो गया है। हालात यह हैं कि लोग बाढ़ में बहकर आई लकड़ियों से भोजन बना रहे हैं। सामाजिक कार्यकर्ता लीला बंग्याल निगम के एमडी पर गैर जिम्मेदाराना रवैया अपनाने का आरोप लगाते हुए उन्हें तत्काल धारचूला से हटाने की मांग की है।
