162 वन ग्राम को राजस्व गांव बनाने की फिर कोशिश

हल्द्वानी। शासन ने एक बार फिर 162 वन ग्रामों को राजस्व गांव बनाने की कोशिश शुरू कर दी है। इस संबंध में शासन ने जंगलात को पत्र लिखा है, जिसके बाद हर प्रभाग से तहसीलवार ऐसे वन गांवों के संबंध में सूचना मांगी गई है, जिन्हें राजस्व गांव बनाया जाना है, इसमें बिंदुखत्ता, दमुवाढूंगा जैसे इलाके भी शामिल है, जो कि आरक्षित वन भूमि पर अतिक्रमण कर बसाए गए हैं।
वन भूमि पर बसे खत्तों और गांवों को लंबे समय से राजस्व गांव बनाए जाने की मांग की जाती रही। इस संबंध में 2004 में एक प्रस्ताव शासन ने केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय को भेजा, जिसे मंत्रालय ने खारिज कर दिया। बिंदुखत्ता के कारण गौला कॉरिडोर प्रभावित होने और संरक्षण को लेकर खुद तत्कालीन केंद्रीय वन मंत्री जयराम रमेश तीन साल पहले पहुंचे थे। अब एक बार फिर वन गांवों को राजस्व गांव बनाने की कोशिश हुई है। राजस्व विभाग ने इस संबंध में वन विभाग से जानकारी मांगी। इसके बाद मुख्य वन संरक्षक प्रशासन की तरफ से सभी प्रभागों को एक पत्र भेजा गया, जिसमें राजस्व गांव बनाने को लेकर चल रही प्रक्रिया की जानकारी दी गई है। साथ ही 162 वन गांव, टांगिया ग्राम, खत्तों की सूची (जिले और तहसीलवार) भेजी गई है। वन महकमे को इन गांवों का सत्यापन, प्रारंभिक जानकारी देने को कहा गया है। नैनीताल जिले में बिंदुखत्ता, दमुवाढूंगा समेत 17 वन गांवों (3622 हेक्टेयर पर स्थित) को राजस्व गांव बनाने की पैरवी की जा रही है।
इस बाबत सीसीएफ प्रशासन मोनिष मल्लिक का कहना है कि राजस्व गांव को लेकर प्रक्रिया शुरू की गई है, जिस संबंध में प्रभागों से प्रारंभिक जानकारी मांगी गई है। इस मामले में शासन को अंतिम निर्णय करना है।

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