16 दिसम्बर के बाद पांच गुना बढ़ीं उत्पीडऩ की घटनाएं

16 दिसम्बर के बाद पांच गुना बढ़ीं उत्पीडऩ की घटनाएं

नई दिल्ली: दिल्ली में पिछले साल 16 दिसम्बर को हुई सामूहिक बलात्कार की घटना के बाद आलोचनाओं के घेरे में आई पुलिस ने महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हैल्पलाइन नंबर शुरू करने समेत कई कदम उठाए हैं लेकिन महिलाओं के खिलाफ अपराधों में कमी आने के बजाए इनमें बढ़ौतरी देखने को मिली है। पिछले 13 वर्षों में इस वर्ष बलात्कार के मामले सर्वाधिक हुए लेकिन दिल्ली पुलिस का कहना है कि ऐसा इसलिए है क्योंकि लोग अब जागरूक हो गए हैं और मामले दर्ज कराने लगे हैं जबकि पहले ऐसे मामले दर्ज ही नहीं कराए जाते थे। दिल्ली पुलिस के आंकड़े के अनुसार राष्ट्रीय राजधानी में 30 नवम्बर तक बलात्कार के कुल 1,493 मामले दर्ज किए गए जो कि 2012 में इसी अवधि में दर्ज मामलों की तुलना में दोगुने से अधिक हैं। सबसे बड़ी चिंताजनक बात यह है कि महिलाओं के खिलाफ उत्पीडऩ के मामलों में 5 गुना बढ़ौतरी दर्ज की गई है। इस घटना से लोगों में भड़के रोष और हजारों लोगों के सड़कों पर उतर आने के बाद संसद को नया बलात्कार-विरोधी कानून बनाने के लिए बाध्य होना पड़ा था लेकिन यदि राजधानी में महिलाओं की सुरक्षा की बात की जाए तो स्थिति में ज्यादा कुछ बदलाव नहीं आया है। बसों और ऑटो में जी.पी.एस. सिस्टम लगाने, महिलाओं के लिए विशेष गुलाबी ऑटो लाने और यातायात व्यवस्था में सुधार लाने का वादा अभी भी कागजों में ही है। सुमन राजपूत ने कहा, ‘‘आखिर यह किस तरह की मिसाल पेश की जा रही है कि दोषियों को सजा सुनाई तो जाएगी लेकिन उन्हें कभी फांसी नहीं दी जाएगी। और अगर उन्हें सजा दी भी जाएगी तो वह भी वर्षों बाद। ऐसा ही तो पहले भी होता आया है। फिर हम कैसे कह सकते हैं कि ‘कुछ’ बदलाव आया है।’’इस घटना से पैदा हुए देशव्यापी गुस्से की पृष्ठभूमिमें आपराधिक कानून (संशोधन) विधेयक-2013 लाया गया था और इसे आपराधिक अधिनियम (संशोधन) 2013 का नाम दिया गया था।

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