
पहाड़ में वाहन संचालन भी बड़ा रोजगार है। इस बार आपदा से तबाह पहाड़ में इस रोजगार पर भी झटका लगा है। अधिकांश सड़कें क्षतिग्रस्त होने से छोटी-बड़ी गाड़ियां जहां-तहां फंसी है। जिससे उनका संचालन नहीं हो पा रहा है। जहां कहीं हो भी रहा है, वहां वह डीजल का पैसा तक नहीं उठा पा रहे हैं। ऐसे में गाड़ी मालिकों ने परमिट सरेंडर करना ही उचित समझा है। चमोली, पौड़ी, उत्तरकाशी और टिहरी जिले में 153 गाड़ी मालिक परमिट सरेंडर कर चुके हैं। हालांकि उत्तरकाशी में एआरटीओ दफ्तर परमिट सरेंडर करने से पहले टैक्स जमा करने को कह रहे हैं।
केस एक-
गंगोल गांव के लखपत ने चार धाम यात्रा शुरू होने से ठीक पहले बैंक से लोन लेकर वाहन लिया। लेकिन 16 जून की आपदा से वाहन कालीमठ में फंसा है। उसका कहना है कि लोन के लिए उसने अपनी पैतृक जमीन भी बेच दी है। अब बैंक की किश्त और परिवार का भरण-पोषण कैसे होगा ये समझ में नहीं आ रहा है।
केस दो –
गैरसैंण के राकेश ने चारधाम यात्रा के लिए टवेरा वाहन पंजीकृत कराया था। जो आपदा के बाद से बदरीनाथ धाम में फंसा है। जिससे राकेश को भारी आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है। उनका कहना है कि आपदा से यात्रा पूर्ण बंद हो गई है। जिससे आमदनी में नुकसान तो होना ही था। लेकिन वाहन फंसे होने से आमदनी का कोई रास्ता नहीं बचा है।
केस संख्या- 3
-पौड़ी के बस मालिक रमेश भंडारी ने बताया कि केदारनाथ का एक चक्कर लगाने के बाद यात्रा ठप हो गई। तब से लोकल में ही धक्के खा रहे हैं। हर महीने 112 रुपये प्रति सीट के हिसाब से टैक्स जमा करने की बाध्यता है। ऐसे में मोटर मालिकों की नींद उड़नी स्वाभाविक है।
केस संख्या-4
पौड़ी के ही मोटर मालिक दिनेश खर्कवाल के मुताबिक फिलहाल वह लोकल में चल रहे हैं, लेकिन टैक्सी वाहनों के कारण डीजल का पैसा निकलना भी मुश्किल हो रहा है। प्रतिमाह 3885 रुपये का टैक्स जुटाना चुनौती से कम नहीं है। ऐसे में सरेंडर ही विकल्प है। सरकार टैक्स कम करे तो कई परिवारों की आर्थिकी संभल सकती है।
गाड़ी मालिकों के सामने टैक्स चुकाने का संकट
गोपेश्वर। 16/17 जून को आई जलप्रलय से जहां कई लोगों के वाहन मलबे में दब गए हैं, वहीं सड़कें टूटने से भी वाहनों का संचालन नहीं हो पा रहा है। ऐसी दशा में गाड़ी मालिकों के सामने यात्री टैक्स चुकाना भी मुश्किल हो गया है। ऐसे में जनपद के 29 वाहन मालिकों ने रोड और यात्री टैक्स से बचने के लिए अपनी गाड़ियों के कागज सरेंडर कर दिए हैं।
बदरीनाथ हाईवे के बंद होने से टैक्सी यूनियन गोपेश्वर के 14 और जोशीमठ के पांच वाहन धाम में फंसे हैं। वहीं जनपद में पोखरी, घाट, थराली, देवाल और नारायणबगड़ सहित अन्य सड़कों के बंद होने से अन्य वाहन भी फंसे हैं। ऐसे में गाड़ी मालिकों ने यात्रा और रोड टैक्स के साथ ही बैंक लोन के ब्याज में छूट की मांग की है। वाहन के कागजात सरेंडर करने के बाद गाड़ी मालिकों को रोड टैक्स में तो छूट मिल जाएगी। टैक्सी यूनियन गोपेश्वर, कर्णप्रयाग और जोशीमठ के पदाधिकरियों का कहना है कि गाड़ी की किश्त और वर्ष भर तक घर का खर्च चलाने की चिंता बनी हुई है।
बस मालिकों ने किए हाथ खड़े
पौड़ी। आपदा के बाद प्रभावित हुए परिवहन व्यवसाय से निराश गाड़ी मालिक अब परमिट सरेंडर को विवश हैं।
केदारघाटी में आई आपदा के बाद से ही परिवहन व्यवसाय के ऊपर भी संकट के बादल गहरा गए। कई वाहन केदारघाटी में फंसे हैं। जो वाहन लोकल में चल रहे हैं वह भी कमाने से अधिक गंवा रहे हैं। उसके ऊपर से टैक्स की मार की चिंता अलग से है। यही वजह है कि आरटीओ कार्यालय पौड़ी में अब तक 20 और कोटद्वार में 35 बड़ी बस मालिकों ने परमिट सरेंडर कर दिया है, ताकि टैक्स के आर्थिक बोझ से बचा जा सके।
वाहन टैक्स का विवरण
वाहन टैक्स
बस 122 रुपये प्रति सीट या 3885 रुपये प्रतिमाह)
टैक्सी 9 सीटर 4080 तिमाई
परिवहन कंपनी से अभी कोई निर्देश नहीं आए हैं। उच्चाधिकारियों से पता चला है कि टैक्स रिबेट पर शासन से वार्ता हो रही है। मौजूदा हालातों में वाहन मालिकों का परेशान होना स्वाभाविक है।- एपी ध्यानी, इंचार्ज, जीएमओयूलि पौड़ी
यात्राकाल में बस मालिकों से 15 फीसदी अतिरिक्त टैक्स वसूला जाता है। आपदा ने सारी व्यवस्थाएं खराब कर दी हैं। टैक्स रिबेट को लेकर मुख्यमंत्री से भी वार्ता हुइ र्है। उम्मीद है कोई सही नतीजा सामने आएगा। – जीत सिंह पटवाल, अध्यक्ष जीएमओ परिवहन समिति
नई टिहरी में भी 16 परमिट सरेंडर
नई टिहरी। आपदा की मार वाहन कंपनियों पर भी पड़ी है। सड़कें बंद होने से कई वाहन दूर-दराज के क्षेत्रों में फंसे हुए है। बदरीनाथ-केदारनाथ यात्रियों को लेकर गए कुछ वाहन गौरीकुंड, रामबाडा, बदरीनाथ आदि क्षेत्रों से वापस नहीं आ पाए। आर्थिक परेशानी से जूझ रहे 16 वाहन स्वामियों ने एआरटीओ दफ्तर में अपने वाहनों के परमिट जमा कर दिए हैं। इनमें 10 बडे़ वाहन और ट्रक तथा 6 छोटे वाहन मैक्स, सूमो आदि शमिल है। एआरटीओ सुरेंद्र कुमार ने इसकी पुष्टि की है।
रास्ते बंद होने से टैक्सी वाहनों पर दोहरी मार
उत्तरकाशी। जून में मची तबाही के बाद गंगोत्री राजमार्ग अभी तक न खुलने से बस व टैक्सी वाहनों के समय दोहरा संकट खड़ा हो गया है। गाड़ी तो चल नहीं रही उल्टा सरकार को टैक्स देना पड़ रहा है। जिस पर अब तक 53 वाहनों ने एआरटीओ आफिस में अपनी आरसी सरेंडर कर दी है। वाहन चालक सतवीर रजवार, मंगल सिंह चौहान, प्रथम सिंह रमोला आदि ने बताया कि उनके वाहन गंगोत्री की ओर फंसे हुए हैं। जब वे एआरटीओ आफिस परमिट सरेंडर करने पहुंचे तो उन्हें तीन माह का टैक्स जमा करने को कहा जा रहा है। जब गाड़ी ही नहीं चलेगी तो वे टैक्स कहां से भरें। उन्होंने सरकार से या तो सड़क खोलकर उनके वाहन निकलवाने अथवा टैक्स माफ करने की मांग की है!
टैक्सी वाहनों का टैक्स तिमाही जमा होता है। अब तक तीन बस तथा 50 मैक्सी कैब वाहनों के परमिट सरेंडर हो चुके हैं। जून में सरेंडर होते तो तीन माह का टैक्स जमा नहीं होता। लेकिन अब जुलाई में सरेंडर करने पर तीन माह का टैक्स तो देना ही पड़ेगा।- कुलवंत सिंह चौहान, प्रभारी एआरटीओ उत्तरकाशी।
