
नैनीताल। श्री 1008 प्रकाशानंद स्वामी के आध्यात्मिक और धार्मिक सफर की शुरुआत नैनीताल से हुई थी। श्री 1008 प्रकाशानंद ने दशकों तक यहां पंगोट के निकट टीट स्थित आश्रम में तपस्या की जिससे वे टीट महाराज के नाम से जाने जाते थे। सोनिया गांधी और राहुल सहित देश की प्रख्यात हस्तियां उनकी भक्त थीं।
श्री प्रकाशानंद स्वामी दिव्य दृष्टि तथा महत्वपूर्ण योगिक शक्तियों के धनी थे। वह वर्षों तक सर्दियों में छह माह तक निर्जल निराहार रहकर बदरीनाथ की कंदराओं में शिव आराधना में रहते थे। 140 वर्ष की आयु तक भी वह सक्रिय थे। उनकी 140 वर्ष की आयु बाकायदा उनके पासपोर्ट में दर्ज जन्मतिथि से प्रमाणित है। स्वामी जी 12 बार अलग-अलग रास्तों से कैलाश मानसरोवर की यात्रा कर चुके थे।
नैनीताल में स्वामी जी के कई अनुयायी हैं। अपने टीट स्थित मोक्ष धाम के संचालन का जिम्मा तथा शरीर त्यागने के बाद के सांसारिक क्रिया कर्म की जिम्मेदारी वह नैनीताल निवासी गोपाल को सौंप गए हैं। उनके अनन्य भक्त जाने माने पर्यावरणविद तथा छायाकार अनूप साह के अनुसार उन्हें शरीर त्यागने के वक्त का अहसास हो गया था और वह एक सप्ताह पूर्व जागेश्वर स्थित आश्रम का जिम्मा हेम भट्ट और ऋषिकेश मोक्ष धाम का जिम्मा बसंती देवी को सौंप गए। श्री गोपाल को उन्होंने बताया कि उनका अंतिम संस्कार जागेश्वर स्थित मोक्ष धाम में उसी हवन कुंड में किया जाए जिसमें वह सैकड़ों हवन कर करोड़ों आहुतियां दे चुके थे। उनकी इच्छा के अनुरूप उन्हें पद्मासन की स्थिति में बैठाकर यह संस्कार किया गया तथा अगले तीस दिन तक कुंड में सतत अग्नि प्रज्जवलित रखी जाएगी।
अनूप साह के दादा स्व. चेतराम साह ठुलघरिया स्वामी जी के अनन्य भक्त थे उनके आवास पर स्वामी जी अक्सर आते थे। श्री साह ने बताया कि उनके पड़ोस में एक बार चोरी होने पर स्वामी जी ने चोर का हूबहू हुलिया बयान कर दिया था जो सही साबित हुआ।
श्री साह और श्री गोपाल ने बताया कि देश विदेश की तमाम जानी मानी हस्तियां स्वामी जी की भक्त थीं। सोनिया गांधी और राहुल गांधी सहित तमाम मंत्री, मुख्यमंत्री, राजनेता, अधिकारी, उद्योगपति और न्यायाधीश उनके आश्रम में आते रहते थे। परंतु स्वयं स्वामी जी सांसारिक बंधनों से कोसों दूर थे। महीनों निर्जल निराहार रहना, नंगे पाव हिमालय की यात्रा करना उनके लिए मामूली बातें थीं। स्वामी जी की आध्यात्मिक शक्तियां असीम थीं। उन्हें ग्रह नक्षत्रों का भी गहरा ज्ञान था। उन्होंने अमेरिका और आस्ट्रेलिया में हजारों लोगों को दीक्षित किया।
40 वर्ष पूर्व 100 वर्ष की आयु पूरी करने पर हरिद्वार में उन्हें एक विशिष्ट समारोह में 1008 की पदवी प्रदान की गई थी जिसमें देश विदेश से उनके लगभग पचास हजार अनुयाइयों ने शिरकत की। उनके अंतिम संस्कार में बृहस्पतिवार को गुजरात, महाराष्ट्र, हरियाणा, पंजाब, दिल्ली सहित तमाम प्रांतों से सैकड़ों अनुयायी जागेश्वर पंहुच गए थे। देश के विभिन्न आश्रमों में रह रहे अनेक विदेशी भक्त भी वहां पहुंचे। उत्तराखंड के विभिन्न भागों से आए सैकड़ों भक्तों की उपस्थिति में स्वामी जी का अंतिम संस्कार हुआ।
