
पूर्व आतंकवादियों के पुनर्वास के लिए रियासत सरकार द्वारा बनाई गई योजना के दो साल पूरे हो चुके हैं लेकिन अब तक एक भी शख्स इसके तहत कश्मीर वापस नहीं लौटा है।
दिल्ली पुलिस द्वारा पकड़े गए लियाकत अली शाह जैसे एक हजार से अधिक पूर्व आतंकवादियों ने वापसी के लिए आवेदन दे रखा है, लेकिन उनकी वापसी संभव नहीं हो पा रही है। रियासत सरकार चार चिह्नित रूट से वापसी चाहती है।
ऐसा तभी संभव है, जब पाकिस्तान इसके लिए सहमत हो। चूंकि पाकिस्तान की इस पर सहमति नहीं है इसलिए पूर्व आतंकवादी लियाकत की तरह अवैध रूट पकड़ते हैं और रास्ते में गिरफ्तारी की आशंका बनी रहती है।
गृह राज्य मंत्री सज्जाद अहमद किचलू का कहना है कि लियाकत अली शाह के मामले में जांच की जा रही है कि उसने या उसके परिवार वालों ने वापसी के लिए आवेदन कर रखा था या नहीं। रियासत की नीति उन पूर्व आतंकवादियों के लिए मान्य है जो एक जनवरी 1989 से 31 दिसम्बर 2009 के बीच पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर या पाकिस्तान गए थे।
उनकी वापसी पुंछ-रावलकोट, उड़ी-मुजफ्फराबाद, वाघा (पंजाब) और नई दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के माध्यम से संभव है। जो पूर्व आतंकवादी इन मार्गों से वापस आएंगे, उन्हें आईटीआई और अन्य संस्थानों में रोजगार परक प्रशिक्षण देने की व्यवस्था है ताकि वह अच्छे तरीके से जीवन यापन कर सकें। हथियार छोड़कर सामान्य जीवन बिताने की इच्छा रखने वाले पूर्व आतंकवादियों की मदद के लिए यह नीति बनाई गई है।
इस नीति के तहत दो साल में 241 आतंकवादी पाकिस्तान से जम्मू कश्मीर वापस लौटे हैं लेकिन उनमें से किसी ने भी रियासत सरकार द्वारा तय रूट नहीं अपनाया। अधिकांश नेपाल के रास्ते कश्मीर वापस लौटे हैं। लियाकत शाह की तरह 1089 पूर्व आतंकवादियों और उनके परिवार वालों ने नीति के तहत वापसी के लिए आवेदन दिया है, जिनमें से 109 मामलों में वापसी को हरी झंडी दी गई है। अन्य 980 आवेदनों की जांच हो रही है।
रियासत सरकार का मानना है कि पाक अधिकृत कश्मीर ने लगभग चार हजार आतंकवादी रह रहे हैं जो पहले जम्मू कश्मीर से वहां गए। जिन्हें सीमा पार इलाकों में हथियार चलाने का प्रशिक्षण दिया गया। अवैध रूट से वापस लौटने वाले 241 पूर्व आतंकवादियों में से 113 ने अपने परिवार को भी साथ लाया। चूंकि इनकी वापसी नीति के तहत नहीं हुई इसलिए उन्हें रियासत सरकार ने पुनर्वास के लिए कोई सुविधा नहीं दी।
क्या है वापसी योजना?
जम्मू कश्मीर मंत्रिमंडल ने नवंबर 2010 में आतंकवादियों की वापसी के लिए योजना को मंजूरी दी थी। इसके तहत रियासत सरकार ने चार मार्ग तय किए। पूर्व आतंकवादी पहले आवेदन करते हैं। फिर उनके आवेदनों की जांच होती है।
जांच में जो आवेदन सभी कोणों से उपयुक्त पाए जाते हैं उनकी वापसी के लिए रियासत सरकार द्वारा केंद्र सरकार से सिफारिश की जाती है। इस जांच में यह भी ध्यान रखा जाता है कि योजना का फायदा उठाकर पाकिस्तान किसी पूर्व आतंकवादी को अपने हित के लिए वापस भेजने में सफल नहीं हो सके। लिहाजा इस प्रक्रिया में देर लगती है।
