10 हजार करोड़ पार हुआ वेतन-पेंशन खर्च

शिमला। हिमाचल में वित्त वर्ष 2014-15 में एक नया रिकार्ड बनने वाला है। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के सदन में पेश बजट के आंकड़ों को देखें तो इस साल सरकारी कर्मचारियों एवं पेंशनरों के वेतन और पेंशन का खर्चा राज्य में पहली बार 10 हजार करोड़ रुपये पार जाएगा। यह राज्य की कुल कमाई का 70 फीसदी है।
पिछले एक साल के भीतर राज्य में सरकारी कर्मचारियों की संख्या भी बढ़ी है। 31 मार्च 2013 तक 226382 सरकारी कर्मचारी हिमाचल में हैं। इनके वेतन पर इस अवधि में 7646.97 करोड़ रुपये और पेंशन पर 3496.08 करोड़ खर्च होंगे। यानी कुल खर्चा 11,143.05 करोड़ बनता है। इससे पहले वित्त वर्ष 2013-14 में यह देनदारी 9945.72 करोड़ रुपये थी। हालांकि, आने वाले दिनों में यह देनदारी और बढ़ने वाली है। दो साल बाद यानी वर्ष 2016-17 में केवल वेतन के लिए 10260 करोड़ और पेंशन के लिए 5400 करोड़ चाहिए होंगे। यानी कुल खर्चा 15000 करोड़ से ऊपर।
एक ओर तथ्य यहां ध्यान देने वाला है। वित्त वर्ष 2014-15 में राज्य का कुल बजट 23613 करोड़ और कुल राजस्व आय 16522 करोड़ रुपये है। अब यदि इस अवधि में वेतन और पेंशन के खर्चे में पुराने ऋणों को चुकाने की राशि (4628 करोड़) को भी जोड़ दिया जाए तो खर्चा 15771 करोड़ बनता है। इस देयता को कुल कमाई में से यदि घटा लिया जाए तो साल में विकास कार्यों के लिए केवल 751 करोड़ रुपये बचेंगे। आने वाले दिनों में यह तस्वीर और बिगड़ेगी।

इनसेट-1
सैलरी पर प्लान से भी खर्च होंगे 144 करोड़
एफआरबीएम एक्ट के तहत जारी राज्य सरकार की बजट स्टेटमेंट बताती है कि इस साल कर्मचारियों की सैलरी पर योजना बजट से भी 144 करोड़ खर्च करने होंगे। शेष 7503 करोड़ गैर योजना मद से आएंगे।
इनसेट-2
सब्सिडी का बोझ बढ़कर 800 करोड़ हुआ
वित्त वर्ष 2014-15 में राज्य सरकार पर सब्सिडी का बोझ भी 739 करोड़ से बढ़कर 800 करोड़ रुपये हो जाएगा। यह अनुदान मुख्यतया सस्ते राशन और घरेलू उपभोक्ताओं की बिजली पर खर्च होगा।

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