10 लाख उपभोक्ताओं का चयन बना चुनौती

शिमला। हिमाचल में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अभियान के तहत राजीव गांधी अन्न योजना का लाभ देने के लिए 10 लाख उपभोक्ताओं का चयन करना चुनौती बन गया है। ग्राम पंचायतों की संस्तुति के बाद इनका चयन किया जाना था, लेकिन यह नहीं हो पा रहा है।
हिमाचल सरकार ने इस योजना को 20 सितंबर को लांच किया। 36.82 लाख उपभोक्ताओं को दो रुपये किलो गेहूं और तीन रुपये किलो चावल देने की घोषणा की। अंत्योदय परिवारों को 20 किलो गेहूं और 15 किलो चावल प्रति माह देने का ऐलान हुआ। अन्य परिवारों को तीन किलो गेहूं और दो किलो चावल प्रति सदस्य देने को कहा। स्वत: शामिल परिवारों में से तो ज्यादातर को यह लाभ मिल रहा है, मगर अन्य श्रेणियों को नहीं मिल रहा है। इन वंचितों की संख्या लगभग दस लाख है। स्वत: शामिल किए गृहस्थों में सभी अंत्योदय, बीपीएल, अन्नपूर्णा योजना के लाभार्थी, वृद्धावस्था, नि:शक्तता, कुष्ठ रोग पेंशन आदि लेने वाले सदस्यों के परिजन और पीडीएस परमिट लेने वाले सभी तिब्बती शामिल हैं। इनमें से सामाजिक सुरक्षा पेंशनधारक सदस्यों वाले परिवार इस योजना का लाभ नहीं ले पा रहे हैं। स्वत: शामिल परिवारों के बाद सभी एकल महिलाएं, आश्रमों के अनाथ बच्चे, विधवा मुखिया वाले परिवार, 60 फीसदी से अधिक नि:शक्त सदस्ययुक्त परिवार, भवन एवं सन्निर्माण कर्मकार नियोजन अधिनियम में दर्ज कामगारयुक्त परिवार और मनरेगा में एक साल पहले 50 दिन पूरे करने वाले सदस्ययुक्त परिवार भी इनमें शामिल होने थे। इन्हें ग्राम सभाओं में चुना जाना था, मगर इनका चयन नहीं हो सका है।

इनसेट
मंत्री आश्वस्त, जल्दी निकालेंगे तोड़
राज्य खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री जीएस बाली इससे आश्वस्त हैं कि जल्दी ही इस चुनौती का तोड़ निकाला जाएगा। उन्होंने कहा कि बहुत जल्दी राजीव गांधी अन्न योजना में शेष बचे लगभग 10 लाख लक्षित उपभोक्ताओं का चयन कर लिया जाएगा।

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