
सोलन। चिकित्सकों ने होम्योपैथी से किडनी स्टोन (गुर्दे की पत्थरी )के इलाज का दावा किया है। क्षेत्रीय होम्योपैथी अनुसंधान संस्थान शिमला के चिकित्सकों के मुताबिक उन्होंने इस रोग का शर्तिया इलाज किया है, वो भी बिना किसी शल्य चिकित्सा के। नतीजतन आईजीएमसी से किडनी स्टोन वाले मरीज यहां पहुंचने लगे हैं जिनका इलाज अनुसंधान केंद्र में चल रहा है। चिकित्सकों के मुताबिक होम्योपैथी से मात्र 15 दिनों में असर दिखने लगता है तथा दवाइयों के रेगुलर सेवन से कुछ ही समय में यह पूरी तरह ठीक हो जाता है। मौजूदा समय में होम्योपैथी से कई रोगियों को ठीक किया जा चुका है, वहीं 09 रोगियों को अनुसंधान संस्थान में इलाज चल रहा है।
कैसे होता है किडनी स्टोन
किडनी स्टोन एक खतरनाक बीमारी है। यह अधिकतर पुरुषों में पाई जाती है। इससे व्यक्ति के गुर्दे में सूजन होना शुरू हो जाता है तथा दर्द रहती है। रिसर्च में पाया गया कि पत्थरी कम पानी पीनेे से, खाने में अधिक कैल्शियम लेने, अधिक यूरिक एसिड एवं चपाती खाने वालों में अधिक होने की संभावना है। इससे बचाव के लिए रोजाना दो से ढाई लीटर पानी पीना चाहिए। वहीं चपाती के साथ चावल का सेवन भी करना चाहिए।
निशुल्क किए जा रहे टेस्ट
मौजूदा समय में अनुसंधान संस्थान शिमला में रोगियों को निशुल्क सुविधा भी प्रदान की जा रही है। इसमें एक्स रे, अल्ट्रा साउंड, पेशाब टेस्ट एवं कुछ सामान्य टेस्ट निशुल्क किए जाते हैं। वहीं संस्थान में आने वाले रोगियों को दवा एवं खाने पीने के परहेज के बारे में भी विशेष तौर पर हिदायतें दी जाती हैं।
सही दवा इस्तेमाल से ठीक हो सकता रोगी : डॉ. एके गुप्ता
इस बारे में क्षेत्रीय होम्योपैथी अनुसंधान संस्थान शिमला के निदेशक डॉ. एके गुप्ता ने बताया शिमला के एक रोगी के शरीर से मात्र दो माह में 10 एमएम की किडनी स्टोन को पूरी तरह पेशाब से बाहर निकाल दिया गया। वहीं सोलन के एक अन्य रोगी से 22 एमएम की पत्थरी अब 14 एमएम की रह चुकी है, जो कुछ ही दिनों में पूरी तरह ठीक हो जाएगी। उन्होंने बताया कि किडनी स्टोन का इलाज होम्योपैथी में संभव है दवा के सही इस्तेमाल से इसे जड़ से उखाड़ा जा सकता है।
