
उत्तराखंड में जून में आई आपदा के बाद से बंद पड़ी हेमकुंड साहिब तीर्थयात्रा को 21 सितंबर से दोबारा शुरू करने को लेकर जिला प्रशासन अब भी संजीदा नहीं है।
जोशीमठ से गोविंदघाट और यहां से 20 किमी पैदल ट्रैक पर सुविधाओं का अकाल है। पानी, बिजली और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाएं यहां बहाल नहीं हुई हैं। सुरक्षा इंतजामों का हाल यह है कि यात्रा के पहले पड़ाव गोविंदघाट की पुलिस चौकी अब भी मलबे में दबी है।
गोविंदघाट में अधिकांश होटलों और लॉज के आपदा से प्रभावित होने से यहां तीर्थयात्रियों के ठहरने की व्यवस्था नहीं है, लिहाजा जोशीमठ से ही यात्रा का संचालन होगा। इस प्रकार जोशीमठ में भी व्यवस्थाएं दुरुस्त नहीं की गई हैं। हेमकुंड पैदल मार्ग में अब भी कई स्थान खतरनाक बने हैं।
घांघरिया से एक किमी की दूरी पर पैदल मार्ग के ठीक ऊपर चट्टान से पत्थरों के छिटकने का खतरा है। थोड़ी सी बारिश होने पर भी यहां पत्थरों का बरसना भी शुरू हो जाता है। इस पेंच पर पैदल रास्ते को ठीक नहीं किया गया है। गोविंदघाट से घांघरिया तक 14 किमी के पैदल रास्ते में जगह-जगह दुकानें आपदा के चलते ध्वस्त हो गईं थीं, जिससे कई स्थानों पर चाय-पानी की भी व्यवस्था नहीं है।
गुरु ग्रंथ साहिब गोविंदघाट पहुंचाया गया
श्री गुरुग्रंथ साहिब को बुधवार को जोशीमठ गुरुद्वारे से विधि-विधान से गोविंदघाट गुरुद्वारे लाया गया। एसडीएम जोशीमठ एपी बाजपेयी और तहसीलदार बीएस भंडारी भी ग्रंथ के साथ गोविंदघाट तक आए। गोविंदघाट में मौजूद करीब 80 सिख तीर्थयात्रियों ने गुरुग्रंथ साहिब को श्रद्धा के साथ गुरुद्वारे में रखा। आपदा के दौरान गुरुग्रंथ साहिब को गोविंदघाट से जोशीमठ गुरुद्वारे में लाया गया था। कोरिया के 13 प्रवासी भारतीय भी जिले में पहुंच गए हैं। ये सभी तीर्थयात्री भी हेमकुंड साहिब की यात्रा पर जाएंगे।
जोशीमठ में होगी पार्किंग की दिक्कत
इस बार हेमकुंड साहिब की तीर्थयात्रा का संचालन जोशीमठ से ही होना है। यहां से 500-500 तीर्थयात्रियों का जत्था हेमकुंड साहिब के लिए छोड़ा जाएगा। लेकिन जोशीमठ में अभी तक वाहन पार्किंग की व्यवस्था नहीं की गई है। यात्राकाल में जोशीमठ में वाहनों का दबाव बढ़ जाता है। यहां लोकल वाहन पार्किंग के लिए भी समुचित जगह नहीं है। ऐसे में तीर्थयात्रा के दौरान यहां वाहन पार्किंग की समस्या सामने आ सकती है।
तीर्थयात्रियों को स्वयं रखना होगा स्वास्थ्य का ख्याल
यात्रा शुरू होने में दो दिन शेष होने के बावजूद स्वास्थ्य विभाग की ओर से गोविंदघाट, घांघरिया और हेमकुंड साहिब में अभी तक चिकित्सकों की तैनाती नहीं की गई है। घांघरिया में सिर्फ एक फार्मेसिस्ट और एएनएम के भरोसे तीर्थयात्रियों की सेहत छोड़ दी गई है। गोविंदघाट गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी ने पैदल ट्रेक के पांच-पांच किमी के दायरे में मोबाइल मेडिकल टीम और एक पुलिस कर्मी तैनात करने की मांग उठाई है।
हेमकुंड साहिब में 21 सितंबर तक बिजली पहुंचा दी जाएगी। यात्रा पड़ावों पर पानी, स्वास्थ्य, बिजली और अन्य सुविधाएं जुटाने के लिए विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए जा चुके हैं। यात्रा का संचालन पूरी तरह से गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी करती है।
