हिलोपा को एक और झटका

घुमारवीं (बिलासपुर)। भाजपा से नाता तोड़कर महेश्वर सिंह की अगुवाई में बनाई गई हिमाचल लोकहित पार्टी के कुनबे से एक और ‘खिलाड़ी’ कम हो गया है। कांगड़ा में दूलोराम के बाद बिलासपुर से पूर्व विधायक कर्मदेव धर्माणी भी अपने पुराने ‘घर’ वापस लौट गए हैं। हमीरपुर जाकर उन्होंने अपने समर्थकों सहित भाजपा में वापसी कर ली है। लोकसभा चुनाव से ठीक पहले उनकी ‘घर’ वापसी भाजपा के लिए राहत भरी साबित हो सकती है। अलबत्ता हिलोपा के लिए यह झटका माना जा रहा है। केडी धर्माणी की ‘घर’ वापसी लोकसभा चुनाव में भाजपा के लिए फायदेमंद होगी। लेकिन विधानसभा चुनाव के दौरान टिकट को लेकर घुमारवीं में ‘जंग’ तेज होेने की संभावनाओं से भी इंकार नहीं किया जा सकता। राजनीतिक जानकारों की मानें तो धर्माणी के वापस आने से आगामी विधानसभा चुनाव में भाजपा के सियासी समीकरण भी बदल सकते हैं। जिला बिलासपुर की लें तो केडी धर्माणी भाजपा छोड़ने के बाद हिलोपा के एक तरह से सबसे वरिष्ठ नेता माने जाते थे। उन्हें हिलोपा ने वरिष्ठ उपाध्यक्ष का भी दायित्व दिया था। भाजपा में वर्षों तक रहने के बाद उन्हें हिलोपा से टिकट भी मिला। यह बात अलग है कि चुनाव में वह विजय नहीं हो सके।

राजनीतिक घटनाक्रम
दो बार घुमारवीं विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर चुके धर्माणी ने भाजपा से बगावत करके पिछला चुनाव हिलोपा के टिकट पर लड़ा था। कर्मदेव धर्माणी ने वर्ष 1990 व 2003 में घुमारवीं विधानसभा क्षेत्र से भाजपा प्रत्याशी के रूप में जीत हासिल की थी। हालांकि 1998 में वह चुनाव हार गए थे, लेकिन तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल की अगुवाई वाली सरकार में उन्हें बीस सूत्रीय कार्यक्रम क्रियान्वयन समिति के उपाध्यक्ष पद से नवाजा गया था। वर्ष 2007 में उनकी हार के बाद पिछले चुनाव में भाजपा ने राजेंद्र गर्ग के रूप में नए चेहरे को मैदान में उतारा था। इससे खफा धर्माणी भाजपा को अलविदा कहकर हिलोपा के टिकट पर मैदान में कूद पड़े थे। अब धर्माणी की वापसी के बाद वह भी टिकट की दौड़ में पुन: शामिल हो सकते हैं।

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